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बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी योजना अटकी

बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी योजना अटकी

बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी की योजना फिल्हाल ठंडे बस्ते में जा सकती है हालांकि, गवर्नमेंट आधार से जुड़े बैंक खातों में यह सुविधा देने के पक्ष में है लेकिन, फ्रॉड  बढ़ते एनपीए को देखते हुए बैंक इस योजना से हाथ खींच रहे हैं सूत्रों के मुताबिक, अभी तक किसी बैंक ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई है वित्त मंत्रालय के साथ हुई मीटिंग में भारतीय रिजर्व बैंक ने इसकी जानकारी दी आपको बता दें, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले वर्ष बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी को लेकर प्रस्ताव दिया था RBI के प्रस्ताव के मुताबिक, ग्राहक अपना बिना खाता नंबर बदले अपना बैंक बदल सकते हैं लेकिन, अब इसमें पेंच फंसता नजर आ रहा है

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UIDAI, NPCI तलाश सकते हैं विकल्प
केंद्र गवर्नमेंट आधार से जुड़े बैंक खातों में पोर्टेबिलिटी की सुविधा देने के पक्ष में है लेकिन, अभी तक बैंकों की तरफ से इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है सूत्रों की मानें तो गवर्नमेंट UIDAI  NPCI को भी इसका विकल्प तलाशने को कह सकती है

बैंकिंग एसोसिशन ने भी किया विरोध
एक तरफ गवर्नमेंट इस योजना को अमल में लाने की जल्दी दिखा रही है वहीं, भारतीय बैंकिंग एसोसिएशन  ट्रेड यूनियन्स योजना के विरोध में हैं वहीं बैंक भी कोर बैंकिंग सिस्टम  दशा का हवाला देकर इससे बचने की प्रयास कर रहे हैं बैंकर्स का मानना है कि खाताधारकों की बड़ी संख्या तकनीकी समस्या इस योजना की राह में बड़ा रोड़ा है

क्या है पोर्टेबिलिटी योजना?
भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गर्वनर एस एस मुन्द्रा ने पिछले वर्ष अकाउंटिग पोर्टेबिलिटी की योजना को लागू करने के लिए बैंकों से बोला था इससे बैंक ग्राहक बिना अपने अकाउंट नंबर बदले बैंक बदल सकता है बैंकों में प्रतिस्पर्धा  ग्राहकों के हितों को देखते हुए इस योजना को बनाया गया था, ताकि बैंक ग्राहकों को सुविधा देने में आनकानी न करें फिलहाल, इस समय राष्ट्र में करीब 80 करोड़ के करीब बैंक अकाउंट हैं पीएम जनधन योजना के बाद 2015 से बैंक अकाउंट में एकाएक भारी बढ़ोत्तरी हुई है

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