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नीति आयोग व स्वदेशी जागरण मंच भिड़े

नीति आयोग व स्वदेशी जागरण मंच भिड़े
वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदे पर शुक्रवार को नीति आयोग  स्वदेशी जागरण मंच सार्वजनिक प्लेटफार्म ट्विटर पर एकदूसरे से भिड़ गए. मंच के पदाधिकारी की ओर से सोशल मीडिया पर किए गए हमले का जवाब खुद आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने दिया. उन्होंने इसमें बोला कि मंच ने हमेशा मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का विरोध किया है. उसने ई-कॉमर्स में एफडीआई का विरोध नहीं किया है.

मंच के सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने इस पूरे प्रकरण पर बोला कि गवर्नमेंट ई-कॉमर्स कंपनी के सौदे पर चुप है. पीएम  वाणिज्य मंत्री ने वालमार्ट के सीईओ से मुलाकात तक नहीं की. इस दौरान आयोग के उपाध्यक्ष कुमार इस सौदे का समर्थन कर रहे हैं. वह कहते हैं कि इस सौदे का हिंदुस्तान में विदेशी निवेश पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा. इसी वजह से उनकी गतिविधि को लेकर सीधे ट्विटर पर सवाल उठाया.

याद रहे कि कुमार ने 16 अरब डॉलर के वालमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदे पर बोला था कि यह सौदा हिंदुस्तान के एफडीआई मानदंडों के अनुरूप है. जबकि मंच का दावा है कि ई-कॉमर्स में एफडीआई को अनुमति ही नहीं है. इससे पहले मंच ने राष्ट्रीय हित की रक्षा के मद्देनजर पीएम से इस सौदे में हस्तक्षेप करने की मांग की थी.

महाजन ने राजीव कुमार पर साधा निशाना

ट्विटर पर महाजन ने राजीव कुमार को इंगित करते हुए बोला कि आप कैसे वॉलमार्ट को क्लीन चिट दे सकते हैं जबकि गवर्नमेंट के पास मामला लंबित है  वह इस पर फैसला लेगी. ट्विटर पर आगे आयोग के उपाध्यक्ष कुमार पर आरोप लगाते हुए महाजन ने बोला कि हम जानते हैं वालमार्ट के प्रति आपका प्रेम, लेकिन मौजूदा समय में आप नीति आयोग के उपाध्यक्ष के पद पर हैं.

जवाब में कुमार ने बोला कि आप व्यापार में एफडीआई के मुद्दे पर सहमत हो सकते हैं या फिर असहमत, लेकिन आपने हमेशा मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई का विरोध किया है, ई-कॉमर्स में नहीं.इस प्रकरण पर महाजन ने वार्ता के दौरान बोला कि इस सौदे से छोटे-मझोले उद्यमों  छोटी दुकानों की मुश्किलें बढ़ेंगी.

उन्होंने बोला कि आयोग के उपाध्यक्ष कुमार गवर्नमेंट की नीति के प्रति सजग नहीं हैं  उन्हें राष्ट्र के छोटे-मझोले व्यापारियों का कोई खयाल नहीं है. सौदे पर जब पूरी गवर्नमेंट चुप है, तब भी उनका वालमार्ट से प्रेम साफ दिखाई दे रहा है.

पिछले दरवाजे से प्रवेश का आरोप
बताते चलें कि वालमार्ट कारपोरेशन ने फ्लिपकार्ट में 77 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण की घोषणा की है, जो ई-कॉमर्स जगत का सबसे बड़ा सौदा है. इंडियन मार्केट में उसका मुकाबला एक अन्य प्रमुख कंपनी ऐमजॉन से होगा. मंच ने आरोप लगाया है कि वालमार्ट राष्ट्र के मार्केट में पिछले दरवाजे से प्रवेश करने के लिए यहां के नियमों को चकमा दे रही है.

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