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SC ने UIDAI के सोशल मीडिया प्रस्ताव पर केंद्र को लगाई फटकार

धारा 377 पर बहस हुई पूरी, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) का सोशल मीडिया एजेंसी की सेवा लेने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सोशल मीडिया मंचों पर निगरानी रखने के लिए आधार योजना चलाने वाले यूआईडीएआई का एजेंसी की सेवा लेने का प्रस्ताव इसके पूर्व के अभिवेदनों के विपरीत है।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से तृणमूल कांग्रेस विधायक मोहुआ मोइत्रा द्वारा मुद्दे पर दायर याचिका पर सुनवाई में सहयोग करने के लिए भी कहा। न्यायालय ने कहा कि यह (निगरानी) आधार मामले में सुनवाई के दौरान यूआईडीएआई द्वारा दिए गए अभिवेदनों के बिल्कुल विपरीत है। यूआईडीएआई जो प्रस्तावित कर रहा है, वह उसके द्वारा आधार की वैधता के संबंध में दी गई दलील के विरुद्ध है।

यूआईडीएआई ने आधार योजना की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत से कहा था कि वह आधार कार्ड धारक नागरिकों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर नहीं रखना चाहता। मोइत्रा ने याचिका में कहा कि यूआईडीएआई इसके निविदा पत्र के अनुसार, सोशल मीडिया एजेंसी की सेवा मांग रहा है जो फेसबुक और टि्वटर जैसे मंचों पर आधार से संबंधित बातचीत पर नजर रखने के लिए ‘ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट’ और ‘सोशल लिसनिंग’ टूल की तैनाती करेगी। विधायक ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया निगरानी एजेंसी की सेवा लेने का कदम सोशल मीडिया मंचों पर निगरानी रखने पर केंद्रित है।

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