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पेट्रोल-डीजल की कीमत काबू करने में जुटी सरकार, ईरान से तेल मंगाने को ढूंढ़ रही नए रास्ते

पेट्रोल-डीजल की कीमत काबू करने में जुटी सरकार, ईरान से तेल मंगाने को ढूंढ़ रही नए रास्ते

नई दिल्ली. पेट्रोल, डीजल के बढ़ते दाम और डॉलर के मुकाबले रुपये की कम होती कीमत पर देशभर में हंगामा मचा हुआ है. क्रूड ऑयल की कीमत को मनमोहन सिंह की सरकार से कंपेयर कर मोदी सरकार को घेरा जा रहा है. ऐसे में पुराने आंकड़ों पर भी गौर करें तो यूपीए के दूसरे कार्यकाल में क्रूड आयल की कीमत सबसे उच्चतम स्तर पर रहीं. उस वक्त क्रूड ऑयल की कीमत 128 डॉलर तक पहुंच गई थी. उस वक्त तेल की कीमत संभालना मुश्किल था लेकिन मनमोहन सिंह थामे रहे और सत्ता छोड़ते वक्त पेट्रोल की कीमत 71.41 रुपये प्रति लीटर थी.

ऐसे में क्रूड ऑयल के हिसाब से बात की जाए तो जून में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि मनमोहन सरकार ने तेल की कीमत संभालने के लिए दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का ऑयल बॉन्ड लिया था जिसे हम चुका रहे हैं. इसके बाद उन्होंने एक बार फिर से अपना बयान दोहराया कि इस बॉन्ड की भरपाई करने की वजह से ही तेल की कीमत बढ़ रही हैं. धर्मेंद्र प्रधान के इस बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने सफाई दी है. आरपीएन सिंह ने कहा कि अमेरिका ने उस वक्त ईरान पर प्रतिबंध लगा रखा था. इसलिए वहां से तेल तो आ रहा था लेकिन उसे पैसे नहीं चुकाए जा रहे थे. यह प्रतिबंध 2016 तक रहा जिससे मोदी सरकार भी दो साल ईरान को पैसे नहीं चुका पाई.

इसके अलावा आरपीएन सिंह ने कहा कि मोदी सरकार पेट्रोल पर 200 प्रतिशत से ज्यादा और डीजल पर 400 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स लगा रही है. खुद को हितैषी बताने वाली मोदी सरकार आखिर किसानों पर इतना टैक्स क्यों लगा रही है क्योंकि किसानों के लगभग सारे काम डीजल पर ही निर्भर करते हैं. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पेट्रोल और डीजल का दाम बढ़ाकर मोटा मुनाफा कमा रही है और जनता परेशान है.

बता दें कि सरकार की तरफ से एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि तेल की कीमत बाजार के डीलरों के हवाले हैं सरकार का इनपर कोई नियंत्रण नहीं है. हालांकि, एक आरटीआई ने मोदी सरकार की फिर से पोल खोल दी. आरटीआई में कहा गया है कि केंद्र सरकार कई देशों को 34 रुपये में पेट्रोल और 37 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से डीजल बेच रही है.

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