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व्हाट्सएप लीक मामलाः दर्जन भर बड़ी कंपनियों के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा सेबी

व्हाट्सएप लीक मामलाः दर्जन भर बड़ी कंपनियों के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा सेबी

नई दिल्ली। शेयर मूल्य के लिए संवेदनशील सूचनाएं व्हाट्सएप पर लीक होने के मामले में बाजार नियामक सेबी जल्द करीब एक दर्जन ब्लूचिप कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। इस मामले में लिप्त कारोबारियों और ब्रोकरों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

कंपनियों के अप्रकाशित तिमाही नतीजों से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं लीक होने से रोकने के लिए सुरक्षा तंत्र में कथित विफलता के लिए कंपनियों को सेबी की चेतावनी का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि सेबी जल्द इस मामले की जांच पूरी करने वाला है।

नियामक ने इस गड़बड़ी के जरिए हासिल की गई अवैध कमाई की जांच की है और संबंधित कंपनियों से आवश्यक जानकारी लेकर पड़ताल की है। ज्यादातर कंपनियों ने सेबी के सवालों का जवाब दे दिया है।शीर्ष अधिकारियों के मुताबिक मूल्य संवेदनशील सूचनाएं लीक होने के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने में विफल रहीं कंपनियों के खिलाफ सेबी कड़ा रुख अपना रहा है।

कंपनियों के अधिकारियों के साथ सांठगांठ करने वाले शेयर बाजार के कारोबारियों और कुछ ब्रोकरेज फर्मों के कर्मचारियों की भी जांच की जा रही है।मामला पिछले साल का व्हाट्सएप पर सूचनाएं लीक होने का मामला पिछले साल सामने आया था। इस मामले में सेबी ने तमाम कंपनियों से अंतरिम आदेश के तहत जानकारियां मांगी थीं।पिछले हफ्ते एचडीएफसी बैंक ने रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया था कि उसने मांगी गई जानकारियां सेबी को दे दी हैं।

सेबी ने बैंक को आंतरिक जांच करके लीकेज के दोषी कर्मचारियों की पहचान करने, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और आवश्यक जानकारी देने के लिए तीन माह का वक्त दिया था। नियामक ने टाटा मोटर्स, एक्सिस बैंक और बाटा इंडिया को भी इसी तरह का आदेश दिया था। इस मामले में करीब एक दर्जन कंपनियां जांच के घेरे में हैं।

सही पाए गए लीक आंकड़े

सेबी के अंतरिम आदेशों के बाद चार कंपनियों ने कहा था कि वह रेगुलेटर के नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगे। सेबी की शुरुआती जांच में पता चला कि संदेह के घेरे में आईं कंपनियों के वित्तीय नतीजे व्हाट्सएप ग्रुप्स पर प्रसारित हुए आंकड़ों से मिलान खाते हैं। कुछ व्हाट्सएप गुप्स पर ये जानकारियां नतीजों की आधिकारिक घोषणासे पहले ही प्रसारित हो गई थीं।

नवंबर 2017 में संवेदनशील जानकारियां लीक होने की मीडिया में रिपोर्ट आने के बाद सेबी ने जांच शुरू की थी।इन्फ्रा ट्रस्ट के प्रिफरेंशियल इश्यू के लिए गाइडलाइन जारीनई दिल्ली (एजेंसी)। लिस्टेड इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्टों की ओर से संस्थागत निवेशकों को यूनिटों के प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट के लिए सेबी ने विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर ट्रस्टों के यूनिटधारकों की ओर से प्रस्ताव पारित होने के बाद 12 महीनों के भीतर प्रिफरेंशियल इश्यू पूरा हो जाना चाहिए। प्रिफरेंशियल इश्यू के तहत कम से कम दो और अधिकतम 1,000 निवेशकों को यूनिट आवंटित की जा सकती है।

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