मनोरंजन

फिल्म रिव्यू: ‘स्त्री’ है कमाल की, डराती है और खूब हंसाती भी

फिल्म रिव्यू: ‘स्त्री’ है कमाल की, डराती है और खूब हंसाती भी

सिनेमा में तेजी से बदलाव आ रहा है उसका असर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री पर भी पड़ रहा है नए-नए प्रयोग रहे हैं, नई टेक्निक आ रही है। नए जॉनर की तलाश की जा रही है। उसी कड़ी में सिने प्रेमी दर्शकों को एक अलग ही तरह की हॉरर कॉमेडी फिल्म देखने को मिलने वाली है। इस फ़िल्म का नाम है- ‘स्त्री’। निर्देशक अमर कौशिक अपने इस प्रयोग में पूरी तरह से सफल रहे हैं। फिल्म स्त्री आप को डराती भी है आप को हंसाती भी है और साथ ही आपको सोचने पर भी मजबूर कर देती है। यह बहुत ही मुश्किल काम है की कॉमेडी और हॉरर के साथ-साथ आप कोई संदेश दे पाए मगर फिल्म के अंत में आपको लगने लगता है अभी तक जो कहा गया जो मनोरंजन किया गया उसका उद्देश्य सिर्फ आपको मनोरंजक तरीके से बांधे रख कर अनोखा मैसेज पहुंचाना भर था। अगर हमारा समाज स्त्री का सम्मान नहीं करेगा, उसे दबाने की कोशिश करेगा तो उसका खामियाजा समाज को भी भुगतना पड़ेगा! अभिनय की बात करें तो राजकुमार राव एक्टिंग के पिच पर सचिन तेंदुलकर की तरह धुआंधार पारी खेलते नजर आते हैं। सीन दर सीन अभिनेता के तौर पर जो प्रोजेक्शन उन्होंने अपने किरदार को दिया है वो काबिले तारीफ है। श्रद्धा कपूर शुरू से आखिर तक आप को बांधे रखती हैं उनके परफॉर्मेंस से रहस्य और गहराता है। पंकज त्रिपाठी शानदार सशक्त अभिनेता हैं और वह अपने किरदार से जिस तरह से खेलते हैं वो किसी कद्दावर अभिनेता के ही बस का है। अपारशक्ति खुराना भी अपने किरदार के साथ न्याय करते दिखे हैं। कुल मिलाकर ‘स्त्री’ एक संपूर्ण मनोरंजक फिल्म है जिसका आनंद आप उठा सकते हैं। फिल्म देखकर कहीं आप डरते हुए सीट पकड़ कर बैठेंगे तो कहीं आप जमकर ठहाके लगायेंगे। और अंततः निर्देशक की सोच की दाद देते हुए मुस्कुराते हुए बाहर आयेंगे।

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