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डॉक्टरों की ‘हायर एजुकेशन’ के लिए बदले गए नियम

डॉक्टरों की ‘हायर एजुकेशन’ के लिए बदले गए नियम

नए सत्र से लागू हो रही संशोधित नीति में डॉक्टरों को उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश या राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) में शामिल होने के लिए विभाग से अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी।

Chandigarh/Alive News : सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों को अब स्नातकोत्तर डिग्री (पीजी) की प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेने की जरूरत नहीं होगी। स्वास्थ्य विभाग ने हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस (एचसीएमएस) और हरियाणा सिविल डेंटल सर्विस (एचसीडीएस) डॉक्टरों के लिए पाठ्यक्रमों से संबंधित नीति में बदलाव किया है।

नए सत्र से लागू हो रही संशोधित नीति में डॉक्टरों को उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश या राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) में शामिल होने के लिए विभाग से अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। दो साल की नियमित सेवा पूरी कर चुके पीजी डिप्लोमा, डिग्री या डीएनबी पाठ्यक्रम करने के लिए बिना वेतन के अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे। अध्ययन की इस अवधि का वेतन नहीं मिलेगा। जो डॉक्टर दो साल के कार्यकाल से पहले ही स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम करना चाहते हैं, नौकरी से इस्तीफा देना होगा।

स्वास्थ्य विभाग में चार साल की नियमित सेवा पूरी कर चुके डॉक्टर पूरे वेतन के साथ एनओसी के लिए पात्र होंगे। कोर्स की निर्धारित अवधि को सेवा अवधि माना जाएगा। पूर्ण वेतन के लिए डॉक्टर उसी स्टेशन पर दावा करेंगे, जहां से वे कोर्स के लिए रिलीव हुए थे। हालांकि तनख्वाह के लिए डॉक्टरों को वजीफे का पूरा पैसा खजाने में जमा कराना होगा।

– केवल एक बार एनओसी लेकर कर सकते हैं कोर्स
नई नीति में सरकारी डॉक्टर पूरे सेवाकाल के दौरान केवल एक बार सरकार से एनओसी लेकर पीजी डिग्री, डीएनबी या डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। यदि डॉक्टर दूसरी और तीसरी काउंसिलिंग में पीजी स्ट्रीम को बदलते हैं तो प्रथम स्ट्रीम की ज्वाइनिंग से दूसरी स्ट्रीम की ज्वाइनिंग की अवधि को अवकाश माना जाएगा। 45 वर्ष की आयु तक के डॉक्टर ही एनओसी के पात्र होंगे।

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