बिहार

अस्पताल प्रशाशन की जानकारी में होता है मरीजो की जान से खिलवाड़

अस्पताल प्रशाशन की जानकारी में होता है मरीजो की जान से खिलवाड़

अस्पताल प्रशाशन की जानकारी में होता है मरीजो की जान से खिलवाड़

आरा(डिम्पल राय)। हर वक्त अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहने वाले जिले के एक मात्र सबसे बडे आईएसओ से मान्यता प्राप्त सदर अस्पताल में उस वक्त अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गई जब मरीज के परिजन सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बाहरी व्यक्ति को ईलाज करता देख भड़क गए। आपको बताते चले कि आईएसओ के तगमे से नवाजा गया जिले का एक मात्र सदर अस्पताल में कभी शव के साथ सौदेबाजी होती है तो कभी अज्ञात शव को कुत्ते का निवाला बनना पड़ता है। वही शव वाहन रहते हुए भी ठेले पर अज्ञात शव को शहर के पॉश इलाके से दुर्गंध भरी महौल में श्मशान पहुचाया जाता है। सिस्‍टम की शवयात्रा निकलते देख लोग भी हश्तप्रद रहते है। जहा पिछले साल के नवम्बर माह में एक अज्ञात महिला द्वारा सदर अस्पताल के सुरक्षा व्यवस्था को धता बनाते हुए इलाज कराने आई गर्भवती महिला को बिना डॉक्टरी परामर्श के इंजेक्शन लगा दिया गया था। इंजेक्शन देने के थोड़े ही देर बाद गर्भवती महिला की हालत बिगड़ने लगी जिसे देख परिजन आक्रोशित हो गए और हंगामा करना शुरू कर दिए थे। आक्रोशित परिजनों का गुस्सा इस कदर भड़का की इंजेक्शन देने वाली अज्ञात महिला की मौके पर ही जमकर पीटाई भी कर दी थी। वही आरा सदर अस्पताल के कार्यगुजारी में एक वाक्य और जुड़ गया है जिसमे आरा सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों की जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है। इस बात का खुलासा आज उस समय हुआ जब एक मरीज के परिजनों ने बाहर से आए स्वास्थकर्मी से अपने मरीज को ईलाज करवाने से इंकार कर दिया। फिर क्या था हंगामा शुरु हो गया और देखते ही देखते मामला धक्का-मुक्की तक जा पहुँचा। दरअसल अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती एक महिला मरीज के परिजनों को इंजेक्शन देने के लिए कोई स्टॉफ नही मिल रहा था। ऐसे में मरीज के परिजन सीधे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुँच गए और वहां ड्यूटी पर तैनात ड्रेसर को इंजेक्शन लगाने के लिए मेडिकल वार्ड चलने को कहा। इमरजेंसी वार्ड में मौजुद ड्रेसर ने अपनी ड्यूटी इमरजेंसी वार्ड में होने की बात कहते हुए मेडिकल वार्ड जाने से साफ मना कर दिया। इसके बाद मरीज के परिजन ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक के पास पहुँचे जहाँ चिकित्सक ने एक निजी कर्मचारी को इंजेक्शन लगाने के लिए मेडिकल वार्ड जाने की बात कही। इसी बात को लेकर मरीज के परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ गया और वे ड्रेसर के साथ हाथापाई पर उतारु होते हुए निजी कर्मचारी से इंजेक्शन ना लगवाए जाने की बात कहते हुए ड्रेसर को जबरन ले जाने लगे। हंगामा बढता देख वहाँ मौजुद चिकित्सकों और अन्य स्वास्थयकर्मियों की पहल पर मामले को किसी तरह शांत कराया गया। वही इस बीच इंजेक्शन लगाने के लिए जा रहा निजी कर्मचारी मौका पाकर फरार हो गया। ऐसे में एक बार फिर ये सवाल उठ रहा है की आरा सदर अस्पताल में तमाम कर्मचारी होने के बावजुद निजी कर्मचारियों का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है।

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