बिहार

बिहार में अधिक से अधिक लोग उर्दू पढ़ लें, यही सरवर साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी:- मुख्यमंत्री

1

पटना (नवसंचार सूत्र)———-:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने रवींद्र भवन में स्व0 गुलाम सरवर जयंती समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इसे “तकरीब यौम-ए-उर्दू” (ऊर्दू दिवस) के रूप में मनाया गया।

मुख्यमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे पहले मैं आयोजकों को इस बात के लिए बधाई देता हूँ कि गुलाम सरवर साहब की याद में तकरीब-ए-उर्दू दिवस का आयोजन किया गया है।

इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर मुझे बेहद खुशी हुई है। यहाॅ उपस्थित श्री गुलाम गौस साहब से पुराना परिचय है और डॉ0 अब्दुल गफ्फूर के साथ हम काम कर चुके हैं। यहाॅ उपस्थित सांसद कहकशां परवीन जी राज्यसभा की प्रोजाईडिंग पैनल में शामिल हुई हैं, जो एक जिम्मेदारी का काम है।

गुलाम सरवर को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र जीवन के आंदोलन से
हम उन्हें जानते हैं। वे ना सिर्फ पत्रकार थे बल्कि उर्दू के प्रति उनकी पूर्ण प्रतिबद्धता थी।
सायंस बैकग्राउंड के होते हुए भी उन्होंने उर्दू के लिए काम किया जिसके लिए बिहार उन्हें
नहीं भूलेगा।

गुलाम सरवर साहब अपनी बातों को मजबूती के साथ बेहतरीन ढंग से रखते
थे। उनके शब्द और भाषा काफी मायने रखते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1977 में जब
जननायक कर्पूरी जी के नेतृत्व में बिहार में सरकार बनी तो उसमें सरवर साहब ने शिक्षा मंत्री के तौर पर काम किया। वे मुझे मानते थे।

1978 में क्यूबा में इंटरनेशनल यूथ कांन्फ्रेंस में युवा जनता के प्रतिनिधि के रूप में मैं भी शामिल हुआ था। इसके लिए उन्होंने हमलोगों को सरकार की ओर से खर्च दिया गया था। इस तरह से उनका स्नेह हमलोगों को बराबर मिलता था। 1974 के आंदोलन में भी उनकी भूमिका थी। 1967 में गैर कांग्रेसी सरकार के निर्माण में सरवर साहब की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उर्दू बिहार की दूसरी राजभाषा है। उर्दू के शब्द काफी प्रभावी
होते हैं जो मुझे भी अच्छा लगता है। सभी को उर्दू जानना चाहिए, पढ़ना चाहिए। इसे धर्म
एवं संप्रदाय से जोड़ना ठीक नहीं है। यह देश की भाषा है, हिन्दुस्तानी भाषा है। हिंदी और
उर्दू के आपसी संबंध से इसमें और समृद्धि आएगी।

अभी जो 27 हजार उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति में पेंडिंग के मामले की चर्चा की गई है, उसके बारे में मैं आपको कहना चाहता हूँ कि चार या पांच अप्रैल को आपलोग अपने कुछ प्रतिनिधि के साथ उपस्थित हों।

मैं मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव एवं अन्य अधिकारियों के साथ बैठकर समस्या का समाधान करने का प्रयास करूँगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं बहाल होने वाले उर्दू शिक्षकों से उम्मीद करता हूँ कि वो अपने छात्रों को ठीक ढंग से उर्दू सिखाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझसे जितना बन पड़ा है, समाज के हर तबके को इन्साफ के साथ तरक्की से जोड़ा है। न्याय के साथ विकास का मतलब हर इलाके का विकास, हर तबके का विकास है। हाशिये पर जो वर्ग हैं चाहे, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग, महिला वर्ग या अल्पसंख्यक वर्ग हों उनके लिए योजना बनाकर काम किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए हुनर कार्यक्रम चलाया गया है,
जिससे वे आमदनी अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में सफल हो रही हैं। इस कार्यक्रम को केंद्र सरकार ने भी अपनाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद जब शिक्षा विभाग की हमने समीक्षा की तो पता चला कि 2,200 से 2,300 अल्पसंख्यक विद्यार्थी ही प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुये हैं। इसके बाद हमने निर्णय लिया कि प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने को प्रेरित करने के लिए उन्हें पुरस्कार दिया जाए।

अल्पसंख्यक वर्ग के प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले छात्र-छात्राओं को दस हजार का पुरस्कार दिया गया, जिसके बाद सभी वर्गों को इसमें शामिल किया गया। इसका इतना असर पड़ा कि अल्पसंख्यक समुदाय के करीब 25 से 26 हजार विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने लगे।

पुरस्कार राशि को मदरसा से प्रथम श्रेणी से पास करने वाले विद्यार्थियों को भी दिया जायेगा। अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शिक्षण संस्थानों में आधारभूत संरचना के लिए भी काम किया गया। अल्पसंख्यक परित्यक्त महिलाओं को दी जाने वाली सहायता राशि 10 हजार रूपये को बढ़ाकर 25 हजार रूपये देने का फैसला किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक युवाओं के रोजगार एवं उद्यमिता विकास के लिए सालाना 25 करोड़ रूपये की सीमा को बढ़ाकर 100 करोड़ रूपये किया गया। जब हमारी सरकार 2005 में बनी तो उस वक्त जो सर्वे हुआ उससे ये पता चला कि साढ़े बारह प्रतिशत बच्चे स्कूलों से बाहर रह जाते थे उनमें ज्यादातर बच्चे अल्पसंख्यक और महादलित समुदाय के थे। उन्हें स्कूल से जोड़ने के लिए तालीमी-मरकज एवं टोला सेवक बहाल किए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी दिली इच्छा है कि उर्दू पढ़ने की सुविधा छात्रों को मिले,
इसके विकास के लिए काम करेंगे। गुलाम सरवर जी के नाम पर भवन का निर्माण कराया
गया है। बिहार में अधिक से अधिक लोग उर्दू पढ़ लें, यही सरवर साहब के प्रति सच्ची
श्रद्धांजलि होगी। अपने जीवन काल में हम उन्हें नहीं भूल पाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आप लोग गुलाम सरवर साहब की स्मृति में एक तिथि तय कर करें, उर्दू दिवस का भव्य आयोजन कीजिए ताकि ज्यादा से ज्यादा उर्दू का प्रचार-प्रसार हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुलाम सरवर साहब ने जो कार्य किया है उसे आगे बढ़ाते रहना है।

मुख्यमंत्री को आयोजकों ने पुष्प-गुच्छ एवं अंग वस्त्र भेंटकर उनका अभिनंदन किया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उर्दू दैनिक अमीन का लोकार्पण भी किया। उर्दू के विकास में महती योगदान के लिए मुख्यमंत्री ने कई लोगों का सम्मान भी किया।

सम्मान पाने वालों में जनाब सैयद बदरूद्दीन, मोहतरमा सुरैया जबीं, मोहम्मद शाबान, श्री ब्रजेश, जनाब नौशाद, श्री लक्ष्मी कांत सजल शामिल थे।

इस मौके पर राज्यसभा सांसद कहकशां परवीन, पूर्व मंत्री श्री अब्दुल गफूर, विधायक
डॉ रामानुज प्रसाद, पूर्व विधान पार्षद श्री गुलाम गौंस, पूर्व विधान पार्षद श्री आजाद गांधी
समेत कई गणमान्य व्यक्ति एवं उर्दू प्रेमी उपस्थित थे।

Leave a Comment