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केंद्र सरकार ने शुरू की डाटा लीक मामले की जांच, आईटी मंत्रालय ने बुलाई बैठक

केंद्र सरकार ने शुरू की डाटा लीक मामले की जांच, आईटी मंत्रालय ने बुलाई बैठक

सोशल मीडिया के जरिए चोरी होने वाले यूजर्स के डाटा लीक मामले में गुरुवार को सरकार ने एक उच्च-स्तरीय जांच शुरू कर दी है। एक उच्च सूत्र ने बताया कि इस जांच में फेसबुक और इंटरनेट के जरिए होने वाले यूजर के डाटा के हेरफेर और उसके संभावित दुरुपयोग जिसमें कि चुनावी नतीजों पर पड़ने वाला प्रभाव भी शामिल है, उसपर चर्चा की गई। आईटी मंत्रालय ने यह जांच तब की जब देश की दो बड़ी पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मामले को आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। दोनों एक दूसरे पर लंदन बेस्ड कैंब्रिज एनालिटिका एजेंसी की सेवा लेने का आरोप लगा रहे हैं जिसपर विभिन्न देशों के 50 मिलियन फेसबुक यूजर के डाटा को चोरी करके उन्हें प्रभावित करने और वोटर के व्यवहार के प्रति भविष्यवाणी करने के आरोप लगे हैं।

एक अंग्रेजी अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सरकार यूजर्स के डाटा के साथ हेरफेर होने के मामले को काफी गंभीरता से ले रही है। यह कुछ ऐसा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यह कदम तब उठाया गया है जब आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर कैंब्रिज एनालिटिका की सेवाएं लेने का आरोप लगाया जिसके जरिए वह वोटर के व्यवहार और चुनाव के दौरान उन्हें प्रभावित कर सकें। मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि सोशल मीडिया कंपनियों जैसे कि फेसबुक के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

डाटा लीक मामले पर फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए गलती को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि यूजर्स का डाटा सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी हमारी है। अगर हम ऐसा नहीं कर पाते हैं तो हमें आपके लिए काम करने का कोई हक नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह विश्वास में सेंध लगाने जैसा है। यूजर्स किसी भी सोशल साइट के साथ जानकारी साझा करते हुए यह विश्वास रखते हैं कि उनकी जानकारी की सुरक्षा हम करेंगे। मैं यह समझने की कोशिश कर रहा हूं कि आखिर ऐसा कैसे हुआ। हम यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसा न हो।

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