दिल्ली

रेरा कानून लागु होने के बाद पहली बार बड़ा फैसला, खरीदार की शिकायत पर बिल्डर्स ने लौटाया पैसा

रेरा कानून लागु होने के बाद पहली बार बड़ा फैसला, खरीदार की शिकायत पर बिल्डर्स ने लौटाया पैसा

नईदिल्ली: जमीन-जायदाद, घर, फ्लेट से जुड़े नए रियल एस्टेट कानून के बारे में कोई भी मकान खरीदारों के बीच जानकारी का अभाव है, इनमें से 74 % को पता नहीं है कि बिल्डर की परियोजना के बारे में कैसे पता कर सकता है कि इसका पंजीकरण संबद्ध प्राधिकरण के पास हुआ है या नहीं, मकान, जमीन आदि के बारे में जानकारी देने वाली पोर्टल मैजिकब्रिक्स के एक सर्वे से यह पता किया है।

सभी राज्यों ने रेरा को अपनाया है और क्रियान्वयन के विभिन्न चरण में हैं, इसीलिए अगर रेरा पोर्टल काम नहीं कर रहा है, मकान खरीदार रेरा प्राधिकरण के पास परियोजना की स्थिति का पता लगा सकता है, इसकी कानून के तहत एक नया मामला सामने आया है, रेरा ने सुपरटेक बिल्डर को एक फ्लैट खरीदार की जमा धनराशि 33.31 लाख रुपये को ब्याज समेत 45 दिन में वापस लौटाने का आदेश दिया था। साथ ही समय पर कब्जा नहीं देने पर ढाई साल के दौरान का दंड ब्याज भी देना होगा। वहीं रेरा का फैसला आने से फ्लैट खरीदारों में एक उम्मीद जगाई है।

नई दिल्ली के वसुंधरा एंक्लेव के मनसारा अपार्टमेंट निवासी सौरभ रोहिल्ला ने सुपरटेक के खिलाफ रेरा में शिकायत दर्ज की गई थी। उन्होंने जुलाई, 2012 में सुपरटेक के इको विलेज-2 प्रोजेक्ट में 1010 वर्ग फीट क्षेत्रफल का फ्लैट बुक किया था। बुकिंग के समय बिल्डर ने अक्तूबर, 2015 में कब्जा देने का वादा किया गया था, लेकिन बिल्डर ने कब्जा नही दिया। इस दौरान सौरभ बिल्डर को 33 लाख रुपये का भुगतान कर दिए थे। बाद में बिल्डर ने फ्लैट का क्षेत्रफल बढ़ाने, किसान प्रतिकर समेत अन्य शुल्क के रूप में सात लाख रुपये की मांग की।

सात में उसे सौरभ ने चार लाख रुपये बिल्डर को दे दिए। जबकि, उसे केवल 1.50 लाख रुपये देने थे। भुगतान करने के बाद बिल्डर ने मई, 2016 तक कब्जा देने का आश्वासन दिया। सौरभ रोहिल्ला ने बताया कि काफी इंतजार करने के बाद दिसंबर, 2017 में बिल्डर के खिलाफ रेरा में शिकायत दर्ज की गई और बिल्डर के पास जमा धनराशि ब्याज समेत वापस कराने की मांग की।

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सुनवाई में पता चला की रेरा ने पाया कि बुकिंग के समय से अब तक खरीदार बिल्डर को 33.31 लाख रुपये का दे चूका है, लेकिन अभी तक कब्जा नहीं दिया है। साथ ही अनुबंध का भी परीक्षण करवाया गया। जिसके तहत अगर खरीदार समय पर बिल्डर को किश्त का भुगतान नहीं करता है तो उसे 24 % प्रति वर्ष की दर से दंड ब्याज देना होगा। वहीं अगर बिल्डर समय पर कब्जा नहीं देता है तो निर्धारित तिथि से विलंब कब्जा देने की तिथि तक बिल्डर को पांच रुपये प्रति वर्ग फीट प्रति माह की दर से विलंब ब्याज देगा। रियल स्टेट के क्षेत्र में रेरा के फैसले ने एक नई उम्मीद जगाई है, एक घर खरीदार के पक्ष में फैसला आने के बाद बाकि के खरीदारों में भी खुशियों की लहर आ गई है, रेरा के द्वारा बिल्डर्स की मनमानी को हमेशा के लिए छुट्टी मिल गई

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