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हार के बावजूद मालदीव की सत्ता में बने रहने के प्रयास में यामीन गयूम

हार के बावजूद मालदीव की सत्ता में बने रहने के प्रयास में यामीन गयूम

माले, एपी। मालदीव के विपक्षी गठबंधन ने बुधवार को कहा कि निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन गयूम हार के बावजूद सत्ता में बने रहने के प्रयास कर रहे हैं। वह हाईप्रोफाइल राजनीतिक बंदियों की रिहाई में भी अड़ंगा डाल रहे हैं। हिंद महासागर स्थित इस द्वीपीय देश में गत रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव में यामीन को विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार इब्राहीम मुहम्मद सोलिह के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। यामीन ने हार के बाद कहा था कि वह 17 नवंबर को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद सोलिह को सत्ता सौंप देंगे।

संयुक्त विपक्ष के प्रवक्ता अहमद महलूफ के अनुसार, सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि यामीन मतदान को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत करने की योजना बना रहे हैं। वह चुनाव के अंतिम नतीजों को देर से जारी किए जाने के लिए दबाव बनाने का भी प्रयास कर रहे हैं।

चुनाव को त्रुटिपूर्ण करार देने के लिए तैयार करा रहे खुफिया रिपोर्ट

चुनाव को त्रुटिपूर्ण बताने के लिए वह अपने वफादार पुलिस अधिकारियों से खुफिया रिपोर्ट तैयार कराने का प्रयास कर रहे हैं। इससे पहले सोलिह की पार्टी डीआरपी के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हमें उम्मीद थी कि पूर्व राष्ट्रपति गयूम को सोमवार को रिहा कर दिया जाएगा। अब हमें पूरा यकीन है कि वह (यामीन) राजनीतिक कैदियों को रिहा नहीं किए जाने को लेकर अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं। यामीन बिना लड़ाई के सत्ता छोड़ने वाले नहीं। ऐसा लग रहा है कि वह राष्ट्रपति पद पर अपना कार्यकाल खत्म होने तक इन राजनीतिक कैदियों को बंदी बनाए रखेंगे।’ चुनाव जीतने के बाद सोलिह ने यामीन से सभी कैदियों को रिहा करने का आग्रह किया था।

निवर्तमान राष्ट्रपति राजनीतिक बंदियों की रिहाई में भी डाल रहे अड़ंगा

यामीन के पांच साल के कार्यकाल के दौरान उनके ज्यादातर प्रतिद्वंद्वी नेता जेल में डाल दिए गए या निर्वासित कर दिए गए। राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद यामीन ने पांच बंदियों को रिहा कर दिया था। लेकिन सबसे लंबे समय तक देश के राष्ट्रपति रहे ममून अब्दुल गयूम समेत कई राजनीतिक कैदियों को उन्होंने बंदी बनाए रखा।

नशीद के बयान पर बिफरा चीन
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने बुधवार को कहा कि मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मद नशीद की चीन के खिलाफ टिप्पणी गैर-जिम्मेदाराना है। चीन समर्थक यामीन की हार के बाद नशीद ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनका देश चीन के साथ हुए समझौतों पर यकीनन पुनर्विचार करेगा और भारत के साथ संबंध सुधारेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि चीन के लिए मालदीव जैसे लोकतांत्रिक देश को समझना कठिन है।

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