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हिंदी दिवस–काव्य पाठ , निंबध एवं सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन–न्यूटन स्कूल

हिंदी दिवस–काव्य पाठ , निंबध एवं सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन–न्यूटन स्कूल

झज्जर —– न्यूटन उच्च विद्यालय में ‘हिंदी दिवस’ के उपलक्ष्य में हिंदी काव्य पाठ, निंबध प्रतियोगिता एवं सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं का शुभारंभ निदेशक महोदय मनोज भारद्वाज,बालेश काद्याण, अश्वनी खासा , मुख्याध्यापक रोहताश सिंह,उप मुख्याध्यापिका उर्मिल बैनीवाल ने माँ सरस्वती के सामने दीप प्रज्वलित करके व माल्यार्पण करके किया।

छठी कक्षा की लड़कियों ने माँ सरस्वती की मधुर स्वर में वंदना की । आठवी कक्षा की लड़कियों ने समूह गान – ‘हिंदी हैं हम वतन हैं’ गाकर वातावरण को मोहक बना दिया । मुख्याध्यापक रोहताश सिंह ने हिंदी भाषा के महत्त्व पर प्रकाश डाला और बताया कि भाषाएँ सभी अच्छी होती हैं। परन्तु हिंदी सबसे प्यारी भाषा है , यह हमारी राजभाषा है , राष्ट्रभाषा है । हिंदी काव्य पाठ प्रतियोगिता में वरिष्ठ वर्ग में अरावली सदन से अंजु ने प्रथम, हिमालय सदन से अनामिका ने द्वितीय व कुशल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कनिष्ठ वर्ग में अरावली सदन से राखी ने प्रथम , कृष ने द्वितीय व विंध्याचल सदन से रोनक ने तृतीय स्थान प्राप्त किया । सुलेख प्रतियोगिता में हिमांशु ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इन सभी प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी छात्र ध् छात्राओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया । इन सभी प्रतियोगिताओं के सभी प्रतिभागियों को विद्यालय निदेशक ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया । प्रतियोगिताओं के समय स्टाफ के सभी सदस्य उपस्थित थे।

अनामिका दसवीं

न्यूटन उच्च विद्यालय की दसवीं – ए की छात्रा अनामिका ने ‘हिंदी दिवस’ की भाषण प्रतियोगिता में अपने भाषण में बताया कि आज हम हिंदी भाषा को बिल्कुल भूलते जा रहे हैं। हम सिर्फ हिंदी दिवस पर ही अपनी हिंदी भाषा को याद करते हैं। जब हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी दूसरे देशों में जाकर हिंदी में भाषण देते हैं और अपनी राष्ट्रभाषा को दूसरे देशों में भी सम्मान दिलाते हैं , तो हम हिंदी भाषा बोलने में क्यों हिचकिचाते हैं।

विद्यालय संचालक मनोज भारद्वाज

न्यूटन उच्च विद्यालय के संचालक मनोज भारद्वाज जी ने ‘हिंदी दिवस’ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि हिंदी भाषा हमारी मातृभाषा है , राजभाषा है , राष्ट्रभाषा है। हमें अपनी भाषा का सम्मान इसे वापस दिलवाना है और हम सब मिलकर इस गौरवमयी भाषा को इसका सम्मान दिलवा सकते हैं। यदि हम सब अपने व्यवहार में हिंदी भाषा का प्रयोग आरंभ कर दें , तो वह दिन दूर नहीं जब हिन्दी भाषा को उसका खोया सम्मान वापिस मिलेगा ।

विद्यालय मुख्याध्यापक रोहताश सिंह

विद्यालय मुख्याध्यापक रोहताश सिंह ने बताया कि हिंदी भाषा का हमारे जीवन में विशेष महत्त्व है। इस भाषा में कोई भी व्यक्ति सहज ही अपने मन के विचार प्रकट कर सकता है। अन्य भाषाओं में अभिव्यक्ति का माध्यम इतना सरल नहीं है। हमें अपनी राष्ट्रभाषा पर गर्व होना चाहिए । यदि हम अपनी हिंदी भाषा देश में रहते हैं , तो हिंदी बोलने में शर्म क्यों करें ।

विद्यालय उपमुख्याध्यापिका उर्मिल बैनीवाल

उपमुख्याध्यापिका उर्मिल बैनीवाल ने बताया कि हम हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाकर सारा वर्ष इस हिंदी भाषा को भूल जाते हैं। संविधान के भाग 17 अध्याय 343 (1) में जब हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा मान लिया गया तो हम इसे अपने व्यवहार में क्यों नहीं लाते । हम आंग्ल भाषा बोलना अपनी शान समझते हैं। प्रतिस्पर्धा के युग में हमें आंग्ल भाषा की आवश्यकता है परन्तु हम अपनी राष्ट्रभाषा , राजभाषा को नहीं भूल सकते । हमें हिंदी भाषी होने पर गर्व करना चाहिए ।

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