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राज्यसभा चुनाव: सरोज की जीत से कांग्रेस में घमासान, दो विधायकों को हटाने की चिट्‌ठी

राज्यसभा चुनाव: सरोज की जीत से कांग्रेस में घमासान, दो विधायकों को हटाने की चिट्‌ठी

रायपुर.भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडे छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की सांसद चुन ली गईं हैं। कांग्रेस के लेखराम साहू को उन्होंने हरा दिया। उनकी इस जीत के साथ ही कांग्रेस का घमासान तेज हो गया क्योंकि कांग्रेस के दो विधायक जोगी कांग्रेस के साथ पूरी तरह खड़े हो गए। इससे नाराज नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल को चिट्ठी लिख दी कि दोनों विधायक आरके राय और सियाराम कौशिक को पार्टी से निकाल दिया जाए।

क्यों पैदा हुए ऐसे हालात

यह स्थिति इस वजह से पैदा हुई क्योंकि ऐन चुनाव से पहले जोगी कांग्रेस ने नया राजनीतिक दांव खेल दिया। जोगी कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी को पत्र भेजा गया कि प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया द्वारा लगातार जोगी कांग्रेस के प्रमुख अजीत जोगी के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी की जा रही है। इसके लिए जब तक पुनिया सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगेंगे तब तक हम कांग्रेस के प्रत्याशी को वोट नहीं देंगे।

अचानक चली गई इस चाल से कांग्रेस के वोट कम हो गए

इससे पहले जोगी कांग्रेस ने भाजपा का विरोध करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन की बात कही थी। अचानक चली गई इस चाल से कांग्रेस प्रत्याशी के तीन वोट कम हो गए। उसे 39 के बजाय 36 विधायकों के वोट ही मिले। इसके विपरीत सरोज को भाजपा के निर्धारित 49 विधायकों से दो वोट अधिक मिले। निर्दलीय विमल चोपड़ा और बसपा के केशव चंद्रा ने भाजपा को वोट दिया। इस तरह सरोज 15 विधायकों के अधिक वोट पाने में सफल रहीं।

भाजपा ने की कांग्रेस विधायक अनिला का वोट रद्द करने की मांग

अमित जोगी, सियाराम और आरके राय ने वोट ही नहीं डाला। मतदान के पहले भाजपा और कांग्रेसी खेमों में सुबह से ही सियासी गहमागहमी रही। विधानसभा पहुंचने से पहले सीएम हाउस में भाजपा विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा और भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडेय भी मौजूद थीं। बैठक में विधायकों को निर्वाचन के संबंध में जरूरी टिप्स दिये गए। मतदान की शुरुआत कांग्रेस ने की। मतदान शुरू होते ही भाजपा ने कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया का मतदान निरस्त करने की मांग की। विधायक और पोलिंग एजेंट शिवरतन शर्मा ने कहा कि अनिला भेड़िया ने मतदान की गोपनीयता का ध्यान नहीं रखा, इसलिये उनका मत निरस्त कर दिया जाए। हालांकि इस आवेदन को रिटर्निंग अधिकारी ने अमान्य कर दिया।

यह थी जोगी समर्थक विधायकों की शर्त
मतदान के दौरान जोगी समर्थक विधायकों अमित जोगी, आरके राय और सियाराम कौशिक ने कांग्रेस के समक्ष शर्त रखी कि प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने अजीत जोगी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है, इसलिये यदि पुनिया सार्वजनिक तौर पर माफी मांगेंगे, तभी वे मतदान में हिस्सा लेंगे। लेकिन ऐसा नहीं होने पर तीनों विधायकों ने मतदान का बहिष्कार किया। हालांकि पुनिया का बयान आया कि उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कांग्रेस को जयचंदों से मुक्त होने की बात कही थी। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने आरके राय और सियारम कौशिक के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
जब कांग्रेस ने निर्वाचन के दौरान खेला आखिरी दांव
कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार लेखराम साहू की ओर से चुनाव आयोग को दी गई लिखित शिकायत में कहा गया कि बीजेपी के विधायक बद्रीधर दीवान, प्रेमप्रकाश पांडेय, रमशीला साहू और अशोक साहू ने निर्वाचन नियमों का उल्लंघन किया है। कांग्रेस के रिटर्निंग ऑफिसर रमेश वर्ल्यानी और राजेश तिवारी ने कहा कि मतदान के दौरान इन्होंने अपने मतपत्र पार्टी के वोटिंग एजेंट को नहीं दिखाया। निर्वाचन नियमों के तहत कोई भी मतदाता यदि अपना मतपत्र पार्टी के अधिकृत वोटिंग एजेंट को नहीं दिखाता तो वह मत अवैध माना जायेगा। लेकिन कांग्रेस की इस शिकायत को भी खारिज कर दिया गया।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का जताया आभार
मुझ जैसी कार्यकर्ता को यह मौका देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी, भाजपाध्यक्ष अमित शाह, मुख्यमंत्री रमन सिंह, प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक का धन्यवाद। साथ ही उन सभी विधायकों का भी धन्यवाद जिन्होंने संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। छत्तीसगढ़ में पहली बार राज्यसभा के चुनाव हुए हैं और मैं चाहती थी कि जीत कर ही जाऊं। कांग्रेस का धन्यवाद इसलिए कि उन्होंने निर्वाचन का अवसर दिया। सांसद बनने के बाद भी कार्यकर्ता की हैसियत से काम करूंगी। संगठन के निर्देश पर आगे बढ़ूंगी।”-सरोज पांडे

सरोज की जीत के बाद दिल्ली में हम और मजबूत होंगे: रमन
नतीजों के बाद मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सरोज पांडेय को बधाई देते हुए कहा कि दिल्ली में हम अब और मजबूत हुए हैं। वे राज्यसभा में यहां के मुद्दे और शिद्दत से उठाएंगी। मुझे खुशी है कि भाजपा विधायक एकजुट रहे। एकजुटता से कांग्रेस को परास्त किया। जबकि कांग्रेस को उसकी संख्या से भी कम वोट मिले। हमें दो वोट अधिक मिले। कांग्रेस अपने ही घर यानी अपने विधायकों को संभाल नहीं सकी। चुनाव लड़ने का दम भरने वाली कांग्रेस को अपनी क्षमता का अहसास नहीं था। मैं शुरू से ही कह रहा था कि हमें अधिक वोट मिलेंगे। सिंह ने कहा कि 2000 के बाद पहली बार विधायकों को राज्यसभा चुनाव में शामिल होने का अनुभव प्राप्त हुआ। अनुभव अच्छा रहा और उत्सुकता भी बनी रही।

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