राजस्थान

क्या सीएम वसुंधरा राजे को भी खाली करना पडेगा बंगला नम्बर 13?

क्या सीएम वसुंधरा राजे को भी खाली करना पडेगा बंगला नम्बर 13?

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी आवासों का निजी आवास के रूप में इस्तेमाल किए जाने के कानून को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास दो महीने के भीतर खाली करने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह किसी एक राज्य का मामला नहीं है, यह पूरे देश का मामला है।

इस निर्णय के आने के बाद राजस्थान के राजनीतिक हलके में सीएम वसुंधराजे राजे का 13 नम्बर बंगला फिर सुर्खियों में आ गया है। मुख्यमंत्री के लिए आवंटित अधिकारिक निवास की बजाय वसुंधरा राजे 13 नंबर बंगले में ही कई साल से रह रही हैं। राजे के धुर विरोधी भाजपा के विधायक घनश्याम तिवाडी ने सुप्रीमकोट का फैसला आते ही दो टूक कहा कि सीएम को अनधिकृत रूप से कब्जे में किया अब बंगला छोडना ही होगा।

दीनदयाल वाहिनी के प्रदेशाध्यक्ष एवं विधायक तिवाडी ने सुप्रीमकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थान में 26 अप्रेल 2017 को बड़ी चालाकी के साथ ‘राजस्थान मंत्री वेतन विधेयक’ लाया गया। इस विधेयक को लाने का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री के द्वारा सिविल लाइन्स के बंगला नंबर 13 पर आजन्म कब्जा करना, मुख्यमंत्री न रहने पर भी जीवन भर के लिए कैबिनेट मंत्री का दर्जा तथा अपनी सुख—सुविधा के लिए जनता की गाढ़ी कमाई में से आजन्म लगभग एक करोड़ रूपए साल की सुविधाओं का इंतजाम करने का था।

गत वर्ष इसी मुद्दे को लेकर हमने 25 मई को लोकायुक्त को ज्ञापन दिया था। इसके बाद 8 जून को प्रेस वार्ता की तथा 12 जून को राज्यपाल को उक्त बिल पर हस्ताक्षर न करने के लिए निवेदन किया ​था। 18 जून को मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा ​और 25 जून को हजारों कार्यकर्ताओं के साथ एकात्म सत्याग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि मैं इस विधेयक को वापस लेने के लिए लगातार लड़ रहा हूं।

तिवाड़ी ने कहा कि अब जब सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तरप्रदेश के संबंध में स्पष्ट निर्णय दे दिया है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजन्म सुविधा देना असंवैधानिक है। इसलिए मुख्यमंत्री राजे तुरंत सिविल लाइंस का बंगला नंबर 13 खाली करें और सीएम के अधिकारिक निवास बंगला नंबर 8 में शिफ्ट हों साथ ही उक्त जागीरदारी प्रथा तथा​ प्रिवी—पर्स की पुनर्स्थापना का काम करने वाले इस काले कानून को वापस लें।

इस मुद्दे को लेकर प्रदेश भर में आम व्यक्ति के मन में रोष है। राजस्थान की जनता की यह भावना है कि इस प्रकार के कानूनों के द्वारा किया जा रहा उसकी संपदा का मनमाना दुरूपयोग बंद हो। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लागू कराने के लिए वाहिनी के कार्यकर्ता विभिन्न गतिविधियों के द्वारा पूरे प्रदेश में आंदोलन व प्रदर्शन करेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री स्थायी तौर पर सरकारी बंगला हासिल करने के हकदार नहीं-शीर्ष अदालत

बीकानेर की तरफ आ रहा जबरदस्त तुफान बाडमेर जैसलमेर सहित नो जिले अलर्ट घोषित

Article क्या सीएम वसुंधरा राजे को भी खाली करना पडेगा बंगला नम्बर 13? took from Sabguru News.

Leave a Comment