उत्तरप्रदेश

विधायकों का दर्द बिच सभा में छलका गया, कहा नहीं सुनते अफसर

उत्तर प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को अधिकतर सदस्यों ने नौकरशाहों पर उपेक्षित व्यवहार का आरोप लगाते हुए इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर मामला करार दिया। दरअसल, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सुखदेव राजभर ने नियम 300 के तहत सदन को सूचित किया कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते और कई मामलों में जनप्रतिनिधियों को दरकिनार करने का प्रयास किया जाता है। यह कार्यपालिका में गिरावट का लक्षण है जिसे स्वस्थ लोकतंत्र के लिये कतई शुभ नही कहा जा सकता।
राजभर ने कहा कि कई बार थानो में विधायक और दरोगा के बीच कहासुनी होने की बात सामने आयी है। उन्हें थानो और अन्य प्रशासनिक दफ्तरों में बेइज्जत किया जाता है। अफसरशाही को इतना हावी नही होना चाहिए कि डेमोक्रेसी कमजोर हो जाए।
राजभर की इस शिकायत का विपक्ष के साथ साथ सत्ता पक्ष के कुछ सदस्यों ने मेज थपथपा कर समर्थन किया। इस पर सपा के आजम खां ने चुटकी लेते हुए कहा कि सत्ता पक्ष भी मानता है कि सरकार की पकड नौकरशाहों पर कमजोर पडी है। इस नाते सदन में अविश्वास प्रस्ताव की पूरी गुंजाइश है हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने मामले की नजाकत को भांपते हुए कहा कि खां मजाक के मूड में है।
हालांकि दीक्षित ने राजभर की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना से इसका जवाब देने को कहा। खन्ना ने कहा कि अफसरशाही पर सरकार की लगाम पूरी तरह सख्त है और यदि किसी सदस्य को अफसरों से कोई शिकायत है तो वह इसकी सूचना सरकार को दे। सरकार बिना विलंब किए उक्त अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेगी।



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