उत्तरप्रदेश

राष्ट्र इतिहास के सबसे बड़े जल संकट से जूझ रहा

राष्ट्र इतिहास के सबसे बड़े जल संकट से जूझ रहा
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड  बिहार एक बार फिर नीति आयोग की रिपोर्ट में फिसड्डी साबित हुए हैं. नीति आयोग के जल प्रबंधन सूचकांक सूची में ये सबसे बेकार प्रदर्शन करने वाले राज्य हैं. वहीं जल प्रबंधन के मामले में गुजरात सूची में लगातार अच्छी स्थान बनाए है.

गवर्नमेंट के थिंक टैंक नीति आयोग की गुरुवार को जारी जल प्रबंधन इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्र इतिहास के सबसे बड़े जल संकट से जूझ रहा है. लाखों जिंदगियां  उनकी आजीविका खतरे में है. केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी  नीति आयोग के चेयरमैन राजीव कुमार द्वारा संयुक्त रूप से जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक तकरीबन 75 प्रतिशत घरों में पीने का पानी मुहैया नहीं है . 84 प्रतिशतग्रामीण घरों में पाइप से पानी नहीं पहुंचता  राष्ट्र में 70 प्रतिशत पानी पीने लायक नहीं है.

जल संकट की गंभीरता को देखते हुए नीति आयोग की रिपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि राष्ट्र के तकरीबन 60 करोड़ लोग पानी की भयंकर कमी से जूझ रहे हैं  साफ पानी न मिलने से हर वर्ष 2 लाख लोगों की मौत हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक आगे यह समस्या  विकराल रूप लेने वाली है  पानी की वर्तमान आपूर्ति के मुकाबले 2030 तक आबादी को दोगुनी पानी की आपूर्ति की आवश्यकता होगी. जिसके चलते करोड़ों लोगों को पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ेगा  इससे जीडीपी में 6 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है.

जल प्रबंधन रिपोर्ट में गुजरात को पहला जगह मिला है, जिसके बाद मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक  महाराष्ट्र का जगह है. जबकि उत्तर पूर्वी राज्यों में त्रिपुरा टॉप पर रहा है, वहीं पिछले दो सालों में राजस्थान ने जल प्रबंधन में अच्छी प्रगति की है.

गडकरी के मुताबिक यह सूचकांक उन राज्यों पर दबाव बनाने में मदद करेगा, जिन्होंने अपनी जल प्रबंधन तकनीकों को बेहतर बनाने के लिए अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, क्योंकि यह सीधे राज्यों में कृषि की समृद्धि से जुड़ा हुआ है.

वैश्विक जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 राष्ट्रों में हिंदुस्तान 120वें जगह पर है.

केपटाउन बनने से बचाएं शहरों को 

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि राष्ट्र में पानी की स्थिति अच्छी नहीं है. पिछले 70 वर्ष में इस पर ध्यान नहीं दिया गया. हर वर्ष इतनी बारिश होती है, बाढ़ आती है लेकिन हमने कभी सोचा ही नहीं कि कभी पानी की समस्या भी हो सकती है. अब स्थिति ऐसी हो गई है कि इस विषय को गंभीरता से लेना होगा. यदि हम अपने शहरों को केपटाउन नहीं बनाना चाहते तो अभी से जल प्रबंधन प्रारम्भ करना होगा.

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