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भारी कॉम्पटीशन के बावजूद, ये तरीका अपना आसानी से बन पाएंगे टीचर

भारी कॉम्पटीशन के बावजूद, ये तरीका अपना आसानी से बन पाएंगे टीचर

उत्तर प्रदेश। सरकारी टीचर की बात करें तो, मौजूदा समय में आर्थिक व सामाजिक रूप से लोगों को संतुष्ट करने वाली जॉब है। ये सब तो ठीक है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या, सरकारी टीचर किस तरह बना जाए? इसके लिए क्या योग्यताएं हैं? इसके लिए किस तरह की तैयारी करनी होगी? कौन से कोर्स करने होंगे? इन सभी जानाकरी से युवा वंछित रह जाते हैं।

इसी के चलते उनकी तैयारी सही दिशा में नहीं हो पाती और वह जब नौकरी के लिए प्रयासरत होते हैं, तो सरकारी टीचर की भर्तियों में उन्हें भारी कॉम्पटीशन का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी सरकारी टीचर बनने का ख्वाब संजोए हुए हैं तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश में सरकारी टीचर किस तरह आप बन सकते हैं, इसकी पूरी जानकारी आपको इस खबर में मिल जाएगी। सरकारी टीचर बनने के लिए हम वह सारी जानकारी लाए हैं जो आपके कैरियर को सही दिशा देगी।

मूलभूत योग्यता-
उत्तर प्रदेश में टीचर बनने के लिए कुछ मूलभूत योग्यताएं निर्धारित की गई है। मौजूदा समय में कुछ बदलाव भी किए गए हैं , जिसमें TET यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा का नियम भी टीचर बनने की योग्यता में ही शामिल कर लिया गया है जबकि इसके अलावा जिस विषय का आप टीचर बनना चाहते हैं उस विषय में स्नातक की उपाधि और टीचिंग का प्रशिक्षण वाला कोर्स जैसे B.Ed या BTC ( डीएलएड) आदि । यह चीजें सरकारी टीचर बनने की मूलभूत योग्यताएं हैं आप नीचे इनके बारे में पूरी डिटेल के साथ जानकारी हासिल कर सकते हैं।

टीईटी क्या है?
अगर आप प्राथमिक विद्यालय में टीचर बनना चाहते हैं। यानी प्राइमरी ( कक्षा 1 से 5 ) या अपर-प्राइमरी ( कक्षा 5 से 8 ) के स्कूल में टीचर बनना चाहते हैं तो आपको भर्ती में शामिल होने के लिये निर्धारित योग्यता को पूरा करना होगा। जिसके अन्तर्गत किसी विषय से स्नातक के साथ शिक्षण का प्रशिक्षण भी प्राप्त करना होगा। उसके बाद आपको टीईटी परीक्षा पास करनी होगी और फिर आप टीचर भर्ती परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।

सबसे पहले आप यह जान ले कि टीईटी एक राज्य स्तरीय परीक्षा है। इसके माध्यम से अभ्यार्थी के शिक्षक बनने की पात्रता य कहें योग्यता को परखा जाता है। इसके परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश शिक्षा बोर्ड करता है। सामान्यतः यह परीक्षा नवंबर या दिसंबर में आयोजित होती है। इस बार यह परीक्षा 4 नवंबर को हो रही है।

साधारण शब्दों में और आधिकारिक रूप से टीईटी का महत्व यह है कि, अगर सरकारी टीचर बनना है। तो टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य है। वैसे तो टीचर बनने के लिये बीएड की डिग्री अनिवार्य है। लेकिन बीएड के बाद टीईटी पास करने पर ही आपको सरकारी नौकरी मिल पायेगी।

एक आवश्यक बात यह भी है कि टीईटी परीक्षा दो तरह से बटी है। एक प्राइमरी और दूसरी अपर-प्राइमरी। प्राइमरी टीचर का अर्थ हुआ कक्षा 1 से 5 तक पढाने वाले शिक्षक। जबकि अपर-प्राइमरी टीचर का मतलब है कक्षा 6 से 8 तक पढाने वाला शिक्षक। आइये आपको टीईटी से संबंधित और जानकारी के साथ आपकी टीचर बनने की राह आसान करते हैं।

परीक्षा के बारे में जानें-
टीईटी परीक्षा दो तरह की होती है। एक प्राइमरी और दूसरी अपर-प्राइमरी। दोनों में अलग अलग स्तर के प्रश्न होतें है। इनमे बहुविकल्पीय प्रश्न आते है। जिसमे परीक्षार्थी को दो उत्तर में से एक सही उत्तर चुनना होता है। परीक्षा अवधि ढाई घंटे की होती है।

अगर आप टीचर बनना चाहते हैं। तो पहले निर्णय कर लें कि कौन से स्तर के टीचर बनेंगे। यानी प्राइमरी य अपर-प्राइमरी। फिर इसके हिसाब से ही अपनी तैयारी करें। अगर आप प्राइमरी का टीचर बनना चाहते हैं तो आपके लिये टीईटी प्रथम प्रश्न पत्र की तैयारी करनी चाहिये और इसकी परीक्षा देनी चाहिये।

वहीं आपको अगर अपर-प्राइमरी का टीचर बनना है तो टीईटी द्वितीय प्रश्न पत्र की परीक्षा आपको पास करनी होगी। यहां सबसे खास बात यह हैं कि आपके यह भी आप्शन होगा कि आप दोनों परीक्षा भी दे सकते हैं। दोनो परीक्षा पास करने पर आपके पास दोनों तरह की शिक्षक भर्ती के अनुसार अपनी दावेदारी का मौका होगा।

फिलहाल सरकार अपर-प्राइमरी का टीचर बनने की योग्यता रखने वालो को प्राइमरी स्तर पर भी मौका देने का प्रावधान जल्द ही आधिकारिक तौर पर लागू कर सकती है।

टीईटी के लिये योग्यता-
टीईटी के लिये जो सबसे जरूरी बात है। वह हैं योग्यता। अगर आप टीचर बनने के लिये टीईटी परीक्षा देना चाहते हैं। तो उससे पहले आपके पास एक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिये। योग्यता की शर्त को आप अच्छे से समझ लीजिये।

प्राइमरी टीचर के लिये टीईटी की योग्यता-
प्राइमरी टीचर बनने के लिये टीईटी पास करने से पहले आपके पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 50% अंकों के साथ बैचलर्स डिग्री होनी चाहिये। यह प्रत्येक कोर्स के साथ अनिवार्य है। इसके अलावा एनसीटीई (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन) अथवा आरसीआई यानी भारतीय पुनर्वास परिषद से मान्यता प्राप्त दो वर्षीय डिप्लोमा होना चाहिये।

आप चाहें तो बैचलर्स डिग्री के साथ आप दो वर्षीय बीटीसी, सीटी (नर्सरी)/ नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (एनटीटी) का कोर्स कर भी सकते हैं। इसके अलावा स्पेशल बीटीसी, स्पेशल बीटीसी उर्दू, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से उर्दू टीचिंग में डिप्लोमा य 11-08-1997 से पूर्व मौलमी-ई-उर्दू की योग्यता आपको टीईटी परीक्षा में बैठने का मौका दे सकती है।

अपर प्राइमरी टीचर के लिये टीईटी की योग्यता-
इसके लिये भी किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 50% अंकों के साथ स्नातक डिग्री होनी चाहिये। यह प्रत्येक कोर्स के साथ अनिवार्य है। इसमें

स्नातक डिग्री और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) से मान्यता प्राप्त बीटीसी डिग्री। भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) से बीड या बीएड स्पेशल एजूकेशन। अगर आपके पास स्नातक में 45% अंक हो तो बीईडी डिग्री लेकर टीईटी पास करिये।

इंटर लेवल पर ऑप्शन-
टीचर बनने के लिये आप इंटर लेबल पर ही तैयारी शुरू कर सकते है। इसके लिये आपको न्यूनतम 50% अंकों के साथ इंटरमीडिएट (10+2) और एनसीटीई व यूजीसी से मान्यता प्राप्त संस्थान से चार वर्षीय बीएससी बीएड/बीए बीएड। जबकि प्राइमरी एजूकेशन में चार वर्षीय डिग्री भी लेकर टीईटी परीक्षा दे सकते हैं।

इसे भी जानें-
टीईटी में बैठने व किसी खास विषय का टीचर बनने के लिये भी व्यवस्था है। इसी तरह अलग अलग विषयों को लेकर भी विशेषता कोर्स होते हैं। अमूमन संबंधित विषय में स्नातक की डिग्री की आवश्यकता पड़ती है। जैसे संस्कृत व अंग्रेजी के लिये इसी विषय में स्नातक और बीटीसी/ नर्सरी टीचर ट्रेनिंग अथवा डीएलएड।

एलटी ग्रेड शिक्षक-
वही, इंटर कॉलेज में टीचर की नौकरी के लिए स्नातक के साथ B.Ed की डिग्री आवश्यक होती है। अब एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती की परीक्षाएं अधिकांश तौर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग कराता है। समय-समय पर इसकी भर्तियां होती रहती हैं और इसमें भी लिखित परीक्षा के आधार पर चयन किया जाता है।

 

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