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सिर्फ मुस्लिम ही नहीं इस बीमारी से पीड़ित लोग भी रख सकते हैं रोज़ा, मिलेगा लाभ

सिर्फ मुस्लिम ही नहीं इस बीमारी से पीड़ित लोग भी रख सकते हैं रोज़ा, मिलेगा लाभ

 लखनऊ : रमज़ान के पाक महीने की शुरुआत होते ही रोज़े रखने का ख्याल ही कई बार डायबिटीज और दिल के रोगियों के मन में कई सवाल खड़े कर देता है। रोज़ों के दौरान लंबे समय तक भूखा रहना पड़ता है। वैसे भी इस साल रोज़े करीब सवा 15 घंटों के हैं।

सैफी हॉस्पिटल से जुड़े एन्डोक्रिनोलोजिस्ट डॉ। अल्तमश शेख के मुताबिक, ‘डायबिटीज के मरीज पूरी जानकारी और एक्‍सपर्ट की राय के आधार पर सफलतापूर्वक अपनी डायबिटीज को कंट्रोल करते हुए रोज़े रख सकते हैं।’

 डॉ शेख ने कहा, ‘मरीजों को रोज़ों के दौरान अपने ब्‍लड ग्लूकोस की रेग्‍युलर जांच करनी चाहिए जिससे डायबिटीज को अच्छी तरह से कंट्रोल किया जा सके। जो मरीज सिर्फ गोलियों के सहारे अपनी डायबिटीज का कंट्रोल करते हैं, उनको एक्‍सपर्ट की राय के अनुसार दवाइयों के समय में बदलाव करना चाहिए।’

उन्होंने कहा, ‘रमज़ान के रोज़े करते हुए डायबिटीज के मरीजों को भारी और गरिष्ठ खाने से बचना चाहिए। भजिया, पकौड़े, मिठाइयां और तली हुई चीजों से दूर रहना चाहिए।’

एक्सिस हॉस्पिटल की पोषण एवं आहार विशेषज्ञ डॉ हीना अंसारी ने कहा, ‘रोज़ों के दौरान डायबिटीज के मरीजों को खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान सहूर और इफ्तार दोनों समय प्रोटीन और फाइबर वाले भोजन की मात्रा ज्‍यादा होनी चाहिए। तीखे मसालेदार और नमकीन व्यंजनों से दूर रहना चाहिए और साथ ही ज्‍यादा चाय और कॉफी से भी बचना चाहिए।’

लीलावती हॉस्पिटल के मशहूर हार्ट स्‍पेशलिस्‍ट डॉ शाहिद मर्चेंट ने कहा, ‘जिन मरीजों के दिल की बीमारी स्थिर और कंट्रोल में है उन्हें रोज़े करने में किसी तरह की रोक नहीं है, लेकिन उनकी दवाइयों के समय में एक्‍सपर्ट की राय के मुताबिक बदलाव किया जा सकता है।’

न्‍यूट्रिशिन एडवाइजर और राइटर सोनल चौधरी का मानना है कि रमज़ा का समय आध्यात्मिक उन्नति का होता है और साथ ही सही तरह से रोज़े रख कर सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचाया जा सकता है।

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