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दो तरह के आपको भी हो सकता हैं निपाह वायरस

दो तरह के आपको भी हो सकता हैं निपाह वायरस

केरल में फैले निपाह वायरस से पूरे राष्ट्र में डर का मौहाल है केरल में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है वहीं, बंगाल से भी निपाह वायरस के चलते एक सेना के जवान की मौत होने की समाचार है निपाह को लेकर केंद्र गवर्नमेंट से सेना तक ने एडवाइजरी जारी की है लेकिन, अभी तक न तो खतरा टला है न ही कोई सटीक उपचार मिला है केरल में फैले निपाह वायरस को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है निपाह वायरस भी दो तरह के हैं, जिनमें ज्यादा खतरनाक वायरस बांग्लादेश से है केरल में जिस निपाह से लोगों की जान जा रही है उसकी जड़े बांग्लादेश से जुड़ी हैं

दो तरह के हैं निपाह वायरस
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरॉलजी (एनआईवी) ने पुष्टि की है कि केरल में जिस निपाह वायरस ने हाहाकार मचाया है निपाह की जड़ें बांग्लादेश में भी हैं वायरस से पीड़ित मरीजों के बलगम की जांच के दौरान यह सामने आया कि केरल में बांग्लादेश टाइप के निपाह वायरस ने लोगों को अपनी गिरफ्त में लिया दरअसल, निपाह वायरस को दो भागों में बांटा गया है एक प्रकार है मलेशिया (NiVM)  दूसरा है बांग्लादेश पैटर्न (NiVB), वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये दोनों पैटर्न ही निपाह वायरस के सबसे खतरनाक प्रकार हैं,  इनकी मृत्यु दर 60 प्रतिशत से 85 प्रतिशत तक है

क्या होता है निपाह वायरस
WHO की रिपोर्ट के अनुसार निपाह वायरस चमगादड़ की एक नस्ल में पाया जाता है यह वायरस उनमें प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है ऐसे में उनके द्वारा खाए गए फल, उनके अपशिष्ट जैसी चीजों के संपर्क में आने पर यह वायरस किसी भी अन्य जीव या इंसान को प्रभावित कर सकता है ऐसा होने पर ये जानलेवा बीमारी का रूप ले लेता है

मलेशिया में सबसे पहले सामने आया था मामला
1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाहह में इस वायरस से प्रभावित होने का मामला सामने आया था जांच में पता चला था कि चमगादड़ द्वारा खाए गए फल या किसी वस्तु से वहां के सुअरों में ये वायरस फैला जो बाद में इंसानों तक जा पहुंचा इस वायरस से प्रभावित लगभग 50 फीसदी मरीजों की मौत हो गई थी

वायरस के लक्षण
निपाह वायरस के बॉडी में प्रवेश करने पर प्रभावित आदमी में बुखार, सिरदर्द, चक्कर, सोचने में दिक्कत मानसिक भ्रम जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं ये वायरस तेजी से फैलता है  दिमाग को प्रभावित करता है, जिससे 48 घंटों के अंदर ही आदमी कोमा में जा सकता है सही  वक्त पर इलाजनहीं मिलने पर मरीज की मौत हो सकती है ये बीमारी छूने से भी फैलती है ऐसे में मरीज से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है एहतियात के तौर पर मरीज की मौत हो जाने की स्थिति में उसके मृत शरीर को भी न छूने की हिदायत दी जाती है

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