मध्यप्रदेश

19 करोड़ यूनिट बिजली प्रतिदिन हो रही खर्च, 350 गुना बढ़ा फसल का उत्पादन

19 करोड़ यूनिट बिजली प्रतिदिन हो रही खर्च, 350 गुना बढ़ा फसल का उत्पादन

जब से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता संभाली है, तब से उन्होंने कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के काम को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। जिसके परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर 4 वर्ष से औसत 18 प्रतिशत है और मध्यप्रदेश को लगातार पांच बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिला है। दलहन, तिलहन, चना, मसूर, सोयाबीन, अमरुद, टमाटर, और लहसुन के उत्पादन में मध्यप्रदेश पूरे देश में अव्वल है। गेहूं, अरहर, सरसों, आंवला, संतरा, मटर और धनिया के उत्पादन में मध्यप्रदेश का दूसरा नंबर है एवं दूध के उत्पादन में मध्य प्रदेश भारत में तीसरे नंबर पर है। आज से 15 साल पहले मध्य प्रदेश में 24 घंटे बिजली की उपलब्धता की बात सोचना भी शेखचिल्ली के सपने जैसा था, अब राज्य में अघोषित बिजली कटौती इतिहास की बात हो गई है। घरों में 24 घंटे और कृषि कार्य के लिए 10 घंटे बिजली उपलब्ध हो रही है, यह उपलब्धि इसीलिए भी और ज्यादा महत्व रखती है कि मध्यप्रदेश में 2003 में जहां बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 64.40 लाख थी, वहीं अब बढ़कर 1 करोड़ 23 लाख 82 हजार हो गई है।

प्रदेश में बिजली की उपलब्धता जो 2003 में मात्र 5173 मेगावाट थी, अब बढ़कर 18364 मेगावाट हो गई है। मध्यप्रदेश में विद्युत अधोसंरचना के विकास पर 13 वर्षों में लगभग 84000 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। मध्यप्रदेश के प्रमुख सचिव ऊर्जा आईसीपी केसरी की बात पर यकीन किया जाए तो किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली मिले, इसके लिए प्रदेश में 19 करोड़ यूनिट बिजली प्रतिदिन खर्च हो रही है, जिसका परिणाम है कि फसल का उत्पादन 350 गुना बढ़ा है। राज्य सरकार ने प्रदेश की आम जनता को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए कई प्राइवेट बिजली कंपनियों से 15 से 20 साल के लिए पीपीए (पावर परचेस एग्रीमेंट) किए हैं। जिससे महंगे दामों में बिजली खरीद कर आम जनता को सस्ते दाम पर सप्लाई की जा रही है। हालांकि सरकार ने घबराहट में आकर यह पीपीए किए हैं, लेकिन इससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने बिजली की सुनिश्चितता उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के कई थर्मल पावर प्लांटों में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए नए प्लांट भी लगाए हैं, जो इस समय सरकार के लिए मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जो वादा आम जनता से किया था कि 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए उसके लिए पूरी तरह से सफल हुए हैं। इसी का परिणाम है कि आज गर्मी के मौसम में प्रदेश के खेतों में लहलहाती फसलें देखी जा सकती हैं।

मध्यप्रदेश में कृषि को मुनाफे का व्यवसाय बनाने के लिए प्रभावी रणनीति बनाकर उस पर कुशलता से अमल किया गया, इसमें कृषि लागत में कमी, कृषि में विविधता लाने, किसानों को उपज का बेहतर मूल्य दिलाने तथा आपदा की स्थिति में उन्हें भरपूर राहत और सहायता देने को महत्व दिया गया है। जिसके परिणाम स्वरुप प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में क्रांति आई है और अब यह कृषि के क्षेत्र में सिरमौर बनकर उभरा है। बीते 4 वर्षों से प्रदेश की कृषि विकास दर औसत 18 प्रतिशत है, जो देश में सबसे अधिक है। प्रदेश में कुल कृषि क्षेत्र 1.99 करोड़ से बढ़कर 2.43 करोड़ हेक्टेयर हुआ है, कुल खाद्यान्न 1.59 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 4.21 करोड़ मीट्रिक टन हुआ है, दलहन उत्पादन 34.88 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 91.69 लाख मीट्रिक टन हुआ है, तिलहन उत्पादन 56.24 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 69.36 लाख मीट्रिक टन हुआ है, गेहूं का उत्पादन 18.79 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 35.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हुआ है, धान की उत्पादकता 10.74 क्विंटल प्रति हेक्टर से बढ़कर 36.11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हुई है, मक्का का उत्पादन 20.68 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 35.54 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हुई है, प्रमाणीकृत बीजों का उत्पादन 14 लाख क्विंटल से बढ़कर 40 लाख क्विंटल हुआ है, प्रदेश में तीसरी फसल का रकबा 0 से बढ़कर 3.45 लाख हेक्टेयर हुआ है, मंडी में कुल आवक 156.96 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 253.07 लाख मीट्रिक टन हुई है। मध्यप्रदेश में 8 ई-मंडियों की स्थापना की गई है, फसल बीमा योजना में शामिल किसानों की संख्या 15.33 लाख से बढ़कर 65.18 लाख हुई है, फसल बीमा योजना

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