मध्यप्रदेश

निजी मंडियों की स्थापना को प्रोत्साहित करने सरकार ने नियम सरल किये

निजी मंडियों की स्थापना को प्रोत्साहित करने सरकार ने नियम सरल किये

भोपाल।प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा निजी कृषि मंडियां स्थापित हों, इसके लिये राज्य सरकार ने नियम सरल कर दिये हैं। ये सरल नियम आगामी 20 सितम्बर 2018 के बाद पूरे प्रदेश में प्रभावशील हो जायेंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में सरकार की ओर से 257 मुख्य तथा 293 उप कृषि मंडियां स्थापित हैं। वर्ष 2000 से प्रदेश में निजी क्षेत्र को भी अपनी स्वयं

की कृषि उपज मंडी स्थापित करने के लिये सरकार द्वारा प्रावधान किये गये तथा वर्ष 2009 में मप्र कृषि उपज मंडी एक से अधिक मंडी क्षेत्रों के लिये विशेष अनुज्ञप्ति नियम बनाये गये। इन निजी कृषि मंडियों की स्थापना करने का उद्देश्य यह था कि किसानों को उनकी उपज का प्रतिस्पर्धी दाम मिल सके। इसके लिये राज्य सरकार ने निजी क्षेत्र के लिये विशेष अनुज्ञप्ति नियम बनाये। लेकिन इसके नियम इतने कड़े थे कि निजी क्षेत्र की बहुत कम कंपनियां अपनी स्वयं की मंडियां स्थापित करने के लिये आगे आईं। वर्तमान में सिर्फ आईटीसी ही एकमात्र ऐसी कंपनी है जिसके पास निजी मंडी का लायसेंस है तथा उसके प्रदेश भर में कुल तीस क्रय केंद्र या मंडियां हैं।

देश के महाराष्ट एवं कर्नाटक ऐसे राज्य हैं जहां निजी मंडी स्थापित करने के नियम काफी सरल हैं तथा वहां दो सौ से 300 तक निजी मंडियां स्थापित हैं जिनमें किसानों को उनकी उपज का अच्छा दाम मिल जाता है। मप्र में निजी मंडी स्थापित करने के नियम इतने कड़े हैं कि भण्डागार चलाने वाले, मिडलमेन तथा प्रसंस्करण वाले न के बराबर निजी मंडी स्थापित करने के लिये आगे आ रहे थे।
ये नियम किये सरल :

अब निजी कंपनी को सब्जी, फल तथा फूल, मसाले हेतु एक या अधिक क्रय केंद्रों में न्यूनतम एक हजार मीट्रिक टन की खरीदी करना होगी। पहले
नियमों में दस हजार मीट्रिक टन की खरीदी का प्रावधान था। तन्तु यानि कपास, तिलहन, धान व दलहन हेतु 2 हजार मीट्रिक टन (पहले तन्तु यानि कपास हेतु 25 हजार मीट्रिक टन, तिलहन व धान एवं दलहन हेतु 50 हजार मीट्रिक टन की खरीदी का प्रावधान था) और वनोपज तथा कृषि औषधीय उपज हेतु 100 मीट्रिक टन (पहले 2 हजार मीट्रिक टन की खरीदी का प्रावधान था) की न्यूनतम खरीदी करना होगी।

इसी प्रकार, निजी मंडी हेतु लायसेंस फीस और लायसेंस के नवीनीकरण की फीस अब मात्र 20 हजार रुपये होगी जोकि लायसेंस मंजूर होने के बाद देय होगी। पहले लायसेंस फीस 2 लाख रुपये थी। प्रतिभूमि जमा करने हेतु भी नियम सरल किये गये हैं। सब्जी, फल, फूल और वनोपज और कृषि औषधीय उपज हेतु प्रति क्रय केंद्र 50 हजार रुपये प्रतिभूति जमा करना होगी जो पहले सब्जी, फल, फूल हेतु 5 लाख रुपये प्रति क्रय केंद्र थी और कृषि औषधीय उपज हेतु प्रति क्रय केंद्र हेतु 2 लाख रुपये थी जबकि मसाले, तन्तु यानि कपास, धान व दलहन हेतु प्रति क्रय केंद्र 1 लाख रुपये की प्रतिभूति देनी होगी जो पहले प्रति क्रय केंद्र 10 लाख रुपये थी।

नियमों में नया प्रावधान यह भी किया गया है कि कंपनी को निजी मंडी में प्रवेश, विक्रय-क्रय, भुगतान तथा तौल काउन्टरों/क्षेत्रों पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने होंगे और क्रय-विक्रय लेखा की डिजिटल बैकअप प्रणाली संधारित करना होगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि निजी मंडियों को भी सरकारी मंडियों की तरह मंडी शुल्क का भुगतान करना होता है। इसके अलावा, जो निजी मंडियां किसानों से उपज की खरीदी के बदले अन्य दैनिक उपयोगी सामान बिना नकद के देती हैं, उन पर ये प्रावधान लागू नहीं होंगे अर्थात वस्तु विनिमय के मामले में ये सरलीकृत नियम लागू नहीं होंगे।
विभागीय अधिकारी का कहना है कि प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का अच्छा दाम मिल सके इसके लिये निजी मंडियों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिये नियम सरल किये गये हैं।

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