मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश: रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 62 की गई, 4.35 लाख कर्मचारियों को फायदा, सरकार के बचेंगे 6600 करोड़

मध्यप्रदेश: रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 62 की गई, 4.35 लाख कर्मचारियों को फायदा, सरकार के बचेंगे 6600 करोड़

भोपाल.चुनावी साल में सरकार ने कर्मचारियों के बड़े वोट बैंक को लुभाने की कोशिश की है। कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र दो साल बढ़ा दी गई है, अब वे 60 के बजाए 62 वर्ष में रिटायर होंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा शुक्रवार को राजधानी में आयोजित प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में की। चौहान ने कहा कि अधिकारियों, कर्मचारियों के प्रमोशन (पदोन्नति में आरक्षण) का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। वे नहीं चाहते कि जब तक कोर्ट में मामला पेंडिंग है। तब तक कर्मचारियों के प्रमोशन में कोई परेशानी आए। इसलिए रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का फैसला लिया है। उम्मीद है इस बीच कोर्ट का फैसला आ जाएगा और कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता खुल जाएगा। हालांकि, यह फैसला राज्य सरकार द्वारा आदेश जारी करने की तारीख से होगा जो अभी तय नहीं है। इसलिए 31 मार्च को रिटायर होने वाले कर्मचारियों को इसका फायदा नहीं मिल पाएगा। वित्त विभाग में अपर मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव का कहना है कि चूंकि मुख्यमंत्री की घोषणा है, इसलिए इस पर कमेंट करना ठीक नहीं है।

सरकार का तर्क
– प्रमोशन में विलंब:
सुप्रीम कोर्ट से प्रमोशन में आरक्षण का फैसला अगले दो साल में आ जाएगा। रिटायरमेंट की उम्र 62 करने से 33 हजार कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ मिल सकेगा।

फैसले के मायने
– चुनावी फायदा: कर्मचारियों को खुश करने के साथ-साथ किसानों पर हो रहे खर्च को भी पूरा करना चाहती है सरकार।
– वित्तीय लाभ: एक साल में 3300 करोड़ रुपए और रिटायरमेंट पर कर्मचारयों पर होने वाला खर्च भी सरकार बचाएगी।

– बेरोजगारी बढ़ेगी :2 साल तक 33 हजार कर्मचारी रिटायर नहीं होंगे, अपेक्षाकृत नौकरियां घटेंगी।

रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का फैसला क्यों? वह सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं…

– आज 1500 कर्मचारी रिटायर होंगे
31 मार्च को 1500 कर्मचारी रिटायर होने हैं। यदि शनिवार को सीएम का आदेश जारी हो जाता है तो यह रिटायरमेंट रुक सकता है।

– लागू होने के लिए आदेश का इंतजार
यह अभी सिर्फ घोषणा है। आदेश की तारीख से कर्मचारियों को इसका फायदा मिलेगा।

– रिटायरमेंट पर औसतन 20 लाख का खर्च
रिटायर होने वाले एक कर्मचारी पर 20 लाख रु. खर्च होता है। शनिवार को रिटायर होने वाले कर्मचारियों पर 300 करोड़ खर्च होगा।

– सालाना 3300 करोड़ बचेंगे
2 साल में करीब 18 हजार कर्मचारियों के रिटायरमेंट पर खर्च होने वाला सरकार का 6600 करोड़ रुपए बचेगा। मतलब इस साल 3300 करोड़ का फायदा।

– 2 दशक से रेग्युलर भर्ती पर प्रतिबंध है
33 हजार पद खाली होने थे। उन पर सीधी भर्ती की उम्मीद नहीं है। रेग्युलर पदों पर 2 दशक से भर्ती पर प्रतिबंध लगा हुआ है। हालांकि सरकार अब नई भर्ती की बातें कर रही है।

– ऐसा ही फैसला कर दिग्गी चुनाव जीते थे
1998 में कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार ने रिटायरमेंट की उम्र 58 से बढ़ाकर 60 साल की थी। इसके बाद वे अगला चुनाव जीत गए थे।

– चुनाव से पहले वादे पूरे करना जरूरी सरकार पर 1.75 लाख करोड़ का कर्ज है। चुनावी साल में वादे पूरा करने के लिए फैसला जरूरी था।

प्रमोशन में आरक्षण का लाभ सभी को मिले
प्रमोशन में आरक्षण का मामला ढाई साल से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सरकार चाहती है प्रमोशन के पात्र सभी कर्मचारी-अिधकारी इसका लाभ ले सकें।

– किसानों से किए वादे पूरे होंगे
भावांतर पर 1900 करोड़, डिफाॅल्टर किसानों पर 2650 करोड़, प्रोत्साहन राशि पर 2000 करोड़ का भुगतान सरकार बची राशि से कर सकेगी।

कई विभागों में पहले से व्यवस्था

– डॉक्टर : 65 साल

– नर्स: 62 साल

– शिक्षक : 62 साल

– चतुर्थ श्रेणी : 62 साल

प्रदेश के 57 लाख बेरोजगारों की फिक्र कौन करेगा

– 11 साल में रोजगार कार्यालयों में 1.5 करोड़ से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। नौकरी मिली सिर्फ 56 हजार 680 युवाओं को। यानी एक प्रतिशत से भी कम।

– वर्तमान में प्रदेश में 57.04 लाख शिक्षित बेरोजगार हो गए हैं। 2016 में 4.23 और 2017 में 3. 45 लाख युवाओं ने रोजगार कार्यालयों में रजिस्ट्रेशन कराया परंतु रोज़गार मिला मात्र 380 को।

– प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद 2012 ही एक ऐसा साल रहा जब रोजगार कार्यालयों से 12000 युवाओं को रोज़गार मिला। उसके बाद लगातार यह संख्या घटने लगी।

वर्तमान और पूर्व वित्तमंत्री अलग-अलग तर्क

जयंत मलैया, वित्त मंत्री

कर्मचारियों की लंबे समय से आयु बढ़ाने की मांग थी जो पूरी हो गई है। सरकार को भी वरिष्ठ अफसरों का लाभ मिल सकेगा जो इस साल रिटायर हो जाते। फैसले का चुनाव से कोई लेना देना नहीं है।

राघवजी, पूर्व वित्तमंत्री

यह चुनावी फैसला है। मेरे समय 2010-11 और 2011-12 में भी यह प्रस्ताव आया था, लेकिन हमने टर्न डाउन कर दिया था। इसकी सीधी वजह थी, नए लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना था।

एसके मिश्रा, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री

सरकार युवाओं को रोजगार देने के लिए कई कदम उठा रही है और सारे विभागों में भर्ती की प्रक्रिया पर विचार चल रहा है। जल्द ही ये काम शुरू होगा।

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