मध्यप्रदेश

उज्‍जैन महाकाल मंदिर प्रांगण में वीडियो बनवाने वाली मॉडल को नोटिस

उज्‍जैन महाकाल मंदिर प्रांगण में वीडियो बनवाने वाली मॉडल को नोटिस

उज्जैन। महाकाल मंदिर में 3 सितंबर को हुई भस्मारती के बाद एक मॉडल युवती द्वारा फूहड़ पोज देकर वीडियो बनवाने के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई की है। युवती का पता लगाकर उसे नोटिस भेजा जा रहा है। नोटिस का जवाब आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इधर, लगातार हो रही इस तरह की घटनाओं से मंदिर की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्थाओं पर सवाल उठे हैं।

बता दें कि 3 सितंबर को तड़के भस्मारती के दर्शन करने आई मुंबई निवासी मॉडल नंदनी कुरील ने मंदिर परिसर में पोज देते हुए फोटो और वीडियो बनवाए थे। 6 सितंबर को मॉडल ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल में ये वीडियो पोस्ट किए। इसके बाद सोशल मीडिया पर वीडियो और फोटो वायरल हो गए। इसे लेकर श्रद्धालुओं ने भी नाराजी जताई।

इन घटनाओं ने भी व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल 

– नए साल के पहले दिन 1 जनवरी 2018 को एक युवती मंदिर के भीतर श्वान को ले गई थी। मामला सुर्खियों में आने के बाद मंदिर समिति ने परिसर में करीब एक सप्ताह तक कुत्ता पकड़ने का अभियान चलाया।

– कुछ समय बाद एक व्यक्ति संध्या आरती के दौरान अपने पालतू तोते को लेकर मंदिर के भीतर बैठा रहा। यह घटना भी काफी चर्चा में रही।

– भाजययुमो के कार्यकर्ता मंदिर के अधिकारियों के साथ नंदी हॉल में छर्रे लेकर पहुंचे और भगवान नंदीजी को छर्रे अर्पित किए। इस घटना पर भी खूब बवाल मचा।

– करीब दो माह पहले नियमित महिला दर्शनार्थियों ने मंदिर में जन्मदिन मनाया तथा नंदी हॉल में केक काट दिया। मंदिर की धर्म परंपरा को ठेस पहुंचाने वाली यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चित रही।

प्रशासक या कलेक्टर देते हैं नंदी हॉल की अनुमति

मुंबई की मॉडल को मंदिर समिति ने 3 सितंबर के लिए नंदी हॉल की भस्मारती अनुमति जारी की थी। भस्मारती दर्शन के बाद युवती ने परिसर और ओंकारेश्वर मंदिर में वीडियो बनवाया था। सवाल यह उठता है कि बीते कुछ समय से भस्मारती दर्शन के लिए नंदी हॉल की अनुमति प्रशासक अभिषेक दुबे या मंदिर समिति अध्यक्ष कलेक्टर मनीषसिंह द्वारा दी जाती है। ऐसे में सवाल उठता है युवती और उसके साथ आए 6 अन्य लोगों को नंदी हॉल की अनुमति किस के द्वारा जारी हुई है, इसकी पड़ताल होना चाहिए।

नोटिस दे रहे हैं

मॉडल नंदनी को नोटिस दिया है। जवाब मिलने पर आगे की कार्रवाई करेंगे। मंदिर की व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास है। 

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