राज्य में 313 जनपद पंचायतें हैं, अगर स्वीकृत राशि को ही खर्च किया गया होगा, तो वह 12,52,00,000 से ज्यादा की राशि होती है.

मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने अपनी एक योजना के प्रचार पर एक दिन में साढ़े 12 करोड़ रुपये खर्च कर दिए. यह खर्च आयोजित मुख्यमंत्री जन-कल्याण (संबल) योजना के कार्यक्रमों पर रकम खर्च कर दी गई.

खबर के मुताबिक सरकारी दस्तावेज इसकी गवाही देते हैं. राज्य के श्रम विभाग की ओर से जारी पत्र से पता चलता है कि आयोजन को सफल बनाने के लिए हर जनपद पंचायत को चार लाख रुपये तक खर्च करने का अधिकार दिया गया था. मध्य प्रदेश में 313 जनपद पंचायतें हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अगर खर्च के लिए दी गई राशि (चार लाख) का ही इस्तेमाल किया गया होगा तो कार्यक्रम में 12 करोड़ 52 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च बनता है. इसमें नगरीय निकायों या जिला व राज्य स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों का खर्च शामिल नहीं है. उनका हिसाब लगाने पर राशि ज्यादा हो जाती है. संचार माध्यमों पर हुए प्रचार का खर्च भी इसमें नहीं जोड़ा गया है.

राज्य सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के साथ अन्य गरीब तबके के परिवारों के लिए संबल योजना की शुरुआत की थी. इस योजना के तहत आने वाले लोगों को क्या-क्या लाभ मिलेंगे, इसी का ब्यौरा देने के लिए शिवराज चौहान ने हरदा के टिमरनी में कार्यक्रम आयोजित किया था. व्यवस्था की गई थी कि उनके इस कार्यक्रम का जनपद स्तर से सीधा प्रसारण हो. इसके लिए आयोजन स्थल पर एक बड़ी स्क्रीन लगाई गई. आयोजन की सफलता के लिए प्रशासन के अधिकारियों से लेकर जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के अफसरों तक को जिम्मेदारी दी गई. साथ ही भीड़ जुटाने का भी लक्ष्य दिया गया. खबर के मुताबिक करीब 5000 लोगों को बुलाने का लक्ष्य दिया गया था. ग्रामीणों को कार्यक्रम स्थल तक लाने के लिए परिवहन, भोजन और पानी सहित अन्य व्यवस्थाएं भी की गई थीं.

बता दें कि राज्य सरकार द्वारा सरकारी पैसा इस तरह खर्च करने पर सवाल उठ रहे हैं. लोगों का कहना है, ‘सरकार अपना जमीनी आधार खोने लगी है. इसलिए वह पार्टी के प्रचार के लिए इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर रही है. आयोजन पर खर्च की गई राशि किसानों के खातों में डाल देते तो उनको बड़ा लाभ होता.’ ।

-शंखनाद ब्यूरो