राजनीति

कर्नाटक में पीएम मोदी ने बोला एक और झूठ, ये रहे नेहरू के भगत सिंह से मिलने के सबूत

पीएम मोदी

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते बुधवार को कर्नाटक में एक रैली के दौरान भगत सिंह और जवाहर लाल नेहरू की जेल में हुई मुलाकात पर एक बड़ा बयान दिया था। पीएम मोदी ने कहा था कि देश की आजादी के लिए लड़ रहे शहीद भगत सिंह को अंग्रेजों ने जेल भेज दिया था, क्‍या उस दौरान कोई कांग्रेसी नेता उनसे मिलने जेल गया था?

रैली में पीएम मोदी यही नहीं रूके, उन्‍होंने आगे कहा कि कांग्रेसी नेता ऐसे भ्रष्‍ट नेताओं से मिलने जरूर जाते हैं, जिन्‍हें जेल हो चुकी है। पीएम मोदी के निजी ट्विटर हैंडल पर भी इस तथ्‍य को ट्वीट किया गया। बता दें कि पीएम मोदी का यह तंज चारा घोटाले में जेल की सजा काट रहे लालू यादव से कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी की एम्‍स में हुई मुलाकात पर था।

वहीं दूसरी ओर अब पीएम मोदी के इस दावे पर सवाल उठने लगे हैं। इस पर दावा किया जा रहा है कि जवाहर लाल नेहरू ने जेल में शहीद भगत सिंह से मुलाकात की थी। एक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि नेहरू ने भगत सिंह के साथ कई और राजनीतिक कैदियों से जेल में मुलाकात की थी।

इसको लेकर उस समय के प्रसिद्ध समाचार पत्र द ट्रिब्‍यून ने अपने 10 अगस्‍त 1929 को खबर प्रकाशित की थी कि लाहौर में नौ अगस्‍त 1929 को नेहरू ने कहा था कि वे कल सेंट्रल जेल और बोरस्‍ट्राल जेल गए थे। यहां उन्‍होंने सरदार भगत सिंह, बटुकेश्‍वर दत्‍त, जतिन्‍द्रनाथ दास और लाहौर षडयंत केस के दूसरे कैंदियों को देखा था। उन्‍होंने आगे कहा था कि ये सभी लोग भूख हड़ताल पर थे। जिन्‍हें जबरन नहीं खिलाया जा सका, वे लोग धीरे-धीरे मौत की ओर बढ़ रहे थे।

उन्‍होंने यह भी कहा था कि उन्‍हें लगता है कि दुख के वक्‍त को आने में अब ज्‍यादा देर नहीं लगेगी। जतिन्‍द्रदास की हालत खासकर खराब थी। इन असामान्‍य बहादुर लोगों से मिलना नके लिए बहुत दुखदायी था। इन्‍हें तकलीफ झेलते हुए देखना पीड़ादायक था।

बता दें कि 12 जून 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को विधानसभा में बम फेंकने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। जब वे इस मामले में लाहौर सेंट्रल जेल में बंद थे तो उन्होंने जेल में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर थी। 10 जुलाई 1929 को भगत सिंह, दत्त और दूसरे ‘कैदियों’ के खिलाफ लाहौर षड़यंत्र में सुनवाई होने लगी।

इसके बाद दूसरे कैदी भी भूख हड़ताल में शामिल हो गये। बता दें कि भूख हड़ताल के दौरान जतिन दास की 13 सितंबर को मौत हो गई थी। वहीं 7 अक्टूबर 1930 को भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजी अदालत ने मौत की सजा सुनाई। इन्हें 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी गई।

आपको बता दें कि इस खबर का सोर्स – Selected Works of Jawaharlal Nehru (1973 edn), Vol 4, p 13 है।

Article कर्नाटक में पीएम मोदी ने बोला एक और झूठ, ये रहे नेहरू के भगत सिंह से मिलने के सबूत took from Puri Dunia | पूरी दुनिया.

Leave a Comment