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जानिए, क्यों आता है अधिक मास?

जानिए, क्यों आता है अधिक मास?

इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, इस बार सूर्य की वृषभ संक्रांति में ही ज्येष्ठ की दो अमावस्याएं व्यतीत हो जाएंगी। पहली अमावस्या के बाद दूसरी अमावस्या तक का समय श्रीपुरुषोत्तम मास होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार 16 मई, बुधवार से ज्येष्ठ का अधिक मास शुरू होगा, जो 13 जून, बुधवार तक रहेगा। धर्म ग्रंथों में इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा गया है।

32 महीने, 16 दिन, 1 घंटा 36 मिनट के अंतराल से हर तीसरे साल अधिक मास आता है। ज्योतिष में चंद्रवर्ष 354 दिन और सौरवर्ष 365 दिन का होता है। इस कारण हर साल 11 दिन का अंतर आता है, जो 3 साल में एक माह से कुछ ज्यादा होता है। चंद्र और सौर मास के अंतर को पूरा करने के लिए धर्म शास्त्रों में अधिक मास की व्यवस्था की गई है।

हमारे विद्वानों ने अधिक मास की व्यवस्था बहुत ही सोच-समझकर की है क्योंकि अधिक मास न आए तो हमारे त्योहार का समय गड़बड़ हो जाएगा। हिंदू धर्म में हर त्योहार ऋतुओं को ध्यान में रखकर मनाया जाता है जैसे- होली गर्मी की शुरूआत में और दिवाली ठंड की शुरूआत में। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सौर मास में हर साल 11 दिन कम होते हैं। ऐसा हर साल होने पर ए

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