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वैष्णो देवी जाने के लिए खुला नया मार्ग, खच्चर रहित होगा

वैष्णो देवी जाने के लिए खुला नया मार्ग, खच्चर रहित होगा

कटरा। श्राइन बोर्ड प्रशासन ने नौ किमी लंबे नए ताराकोट मार्ग को वैष्णो देवी भवन की ओर आने-जाने के लिए खोल दिया। इससे पहले श्राइन बोर्ड प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने नए ताराकोट मार्ग के प्रवेशद्वार के प्रतीक्षा हॉल में विधिवत पूजा-अर्चना की, जिसके बाद देश भर से मां वैष्णो देवी के दर्शन को आए श्रद्धालुओं को इस मार्ग पर आने-जाने की अनुमति दे दी गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए ताराकोट ट्रैक को उद्घाटन से पहले रविवार को श्री माता वैष्णों देवी श्राइन बोर्ड ने अर्धकुवांरी से बाणगंगा के बीच आज ट्रायल रन शुरू कर दिया है। 19 मई को पीएम मोदी इस रूट का उद्घाटन करेंगे। बाणगंगा से अर्धकुंवारी तक 6 किलोमीटर का ट्रैक और कटरा से भवन तक एक ट्टटू मुक्त मार्ग हैं जो विशेष रूप से तीर्थ यात्री उपयोग करेंंगे। मार्ग की चौड़ाई करीब 20 मीटर है।

12 मई को श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष एन एन वोहरा ने तीर्थयात्रियों की सुविधा को बढ़ावा देने के लिए निष्पादन के तहत विभिन्न प्रमुख बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं और सुविधाओं का निरीक्षण करने के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन क्षेत्र का दौरा किया।
इस मार्ग के खुलने से श्रद्धालुओं को राहत मिली है। इस रास्ते पर घोड़े नहीं चलेगे जिससे श्रद्धालुओं को पारंपरिक मार्ग से ही भवन पहुंचने में कदम-कदम पर जाम जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।

ताराकोट मार्ग पर श्राइन बोर्ड द्वारा दो अत्याधुनिक भोजनालयों के साथ ही 4 जलपान केंद्र बनाए गए हैं, जिनका संचालन निजी कंपनी कंट्री इन एंड सुईट करेगी। जो श्रद्धालुओं को भोजन के साथ ही अन्य खाने-पीने की चीजें उपलब्ध करवाएगी। बाणगंगा से आद्कुंवारी तक नए मार्ग से आने-जाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार करते नजर आए। ठीक दोपहर 12:00 बजे श्रद्धालुओं को आद्कुंवारी से इस मार्ग पर जाने की अनुमति श्राइन बोर्ड ने दी। इससे पहले मौके पर मौजूद श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप जम्वाल के साथ ही अन्य श्राइन बोर्ड अधिकारियों ने मां की चुनरी पहनाने के साथ ही प्रसाद देकर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इस नए मार्ग पर घोड़े चलाने पर पाबंदी होगी।

नए मार्ग पर यात्रा के अनुभव को लेकर श्रद्धालु योगेश, मनोज, जयरथ तथा जितेंद्र आर पटेल ने कहा की नए मार्ग के शुरू होने से अब श्रद्धालुओं की मां वैष्णो देवी यात्रा सुखद तथा पूरी तरह से सुरक्षित होगी। अब श्रद्धालुओं को न तो भीड़-भाड़ के कारण परेशानी होगी और न ही घोड़ों की आवाजाही के कारण चोटिल होने का डर रहेगा। श्रद्धालु यात्रा के दौरान इस नए मार्ग पर जयकारे लगाते हुए प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते नजर आए। गौरतलब है कि बाणगंगा से भवन तक पारंपरिक मार्ग की दूरी करीब 14 किलोमीटर है। ताराकोट मार्ग के अलावा एक और वैकल्पिक बैटरी कार मार्ग है, जो आद्कुंवारी से सीधे भवन तक जाता है।

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