टेक्नोलॉजी

स्वदेशी साधक के साथ ब्रह्मोस का पहली बार सफल परीक्षण; रक्षा मंत्री ने दी बधाई

स्वदेशी साधक के साथ ब्रह्मोस का पहली बार सफल परीक्षण; रक्षा मंत्री ने दी बधाई

पोकरण/नई दिल्ली.भारत ने पहली बार स्वदेशी साधक (indigenous seeker) के साथ अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण किया। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने परीक्षण सफल होने के बाद खुद इसकी जानकारी दी और वैज्ञानिकों को बधाई दी। बता दें कि ब्रह्मोस का परीक्षण लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई के साथ भी किया जा चुका है।

क्या कहा सीतारमण ने?
– परीक्षण के बाद सीतारमण ने ‘डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन’ यानी DRDO के वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा- सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का फ्लाइट टेस्ट सुबह 8.42 मिनट पर किया गया और ये कामयाब रहा। ये टेस्ट राजस्थान के पोकरण में किया गया। मिसाइल ने लक्ष्य पर सटीक निशाना साधा। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

हल्की है ब्रह्मोस ALCM
– ब्रह्मोस को ALCM (Air Launched Cruise Missile) कैटेगरी में रखा जाता है। इसका वजन 2.5 टन है। खास बात ये है कि ये थल और नौसेना के लिए तैयार की गई ब्रह्मोस की तुलना में काफी हल्की है। नौसेना और थल सेना को जो ब्रह्मोस दी गईं हैं, उनका वजह 3 टन है। इसका मतलब ये हुआ की एएलसीएम इन मिसाइलों की तुलना में 500 किलोग्राम कम वजनी है। इसे सुखोई-30 फाइटर जेट एयरक्राफ्ट से टेस्ट फायर किया गया।

किसने बनाया?
– ब्रह्मोस को डीआरडीओ और रूस की कंपनी एनपीओ ने मिलकर तैयार किया है।
– एक और अहम बात है कि इसे सुखोई-30 के लिहाज से ही तैयार किया गया। इसकी वजह भी खास है। दरअसल, सुखोई 30 एल्यूमिनियम की जगह टाईटेनियम से तैयार किया गया है। यह बेहद ऊंचे पहाड़ों पर भी बिना एयर टर्बुलेंस के आसानी से और ज्यादा तेजी से उड़ान भरता है।
– सुखोई ऑटो मोड पर सेट करने के बाद भी उड़ान भर सकता है। यह जितना दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में मारक है, उतना ही मैदानी इलाकों में भी।

और क्या खास?
– इस मिसाइल को सुखोई से 500 से 14 हजार मीटर की ऊंचाई से छोड़ा जा सकता है। रिलीज के बाद ब्रह्मोस 100 से 150 मीटर तक नीचे की और ऑटोमोड पर गिरती है। इसके बाद यह तय रूट पर 14 हजार मीटर तक बिल्कुल पिन प्वॉइंट पर टारगेट को तबाह कर देती है।

Leave a Comment