टेक्नोलॉजी

फेक न्यूज से निपटने के लिए व्हॉट्सएप देगा भारतीयों को ट्रेनिंग

WhatsApp पर 5 से अधिक बार Forward नहीं कर पाएंगे एक मैसेज

नई दिल्ली। व्हॉट्सएप ने नई दिल्ली बेस्ड डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन (DEF) के साथ मिल कर लोगों को फेक न्यूज शेयर और उसके बारे में जानकारी देने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। फेक न्यूज से लड़ने और भीड़ के द्वारा अफवाह फैलाने और हत्या के मामलों पर रोक लगाने के लिए यह काम किया जा रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले डीईएफ 10 राज्यों में 40 ट्रेनिंग सेशन का आयोजन करेगी तो वहीं उन जगहों पर भी जहां वोटिंग खत्म होने की कगार पर है।

DEF समुदाय के नेताओं, सरकारी ऑफिशियल्स, शासन प्रबंध प्रतिनिधि, सिविल सोसायटी और छात्रों को ट्रेनिंग देगा जहां कुछ आसान तरीकों की मदद से फेक न्यूज पर काबू पाया जा सकेगा। ट्रेनिंग में कुल 30,000 समुदाय के मेंमबर्स को 7 राज्यों के लिए शामिल किया जाएगा।

डीईएफ के डायरेक्टर ओसामा मंजार ने एक प्रेस स्टेटमेंट में कहा कि एक संगठन ग्रामीण और हाशिए पर रह रहे लोगों की देखभाल के लिए काम करता है तो वहीं ये संगठन की जिम्मेदारी होती है कि वो लोगों को इंटरनेट पर सुरक्षित रखे जहां फेक न्यूज और सिक्योरिटी का मुद्दा सबसे ऊपर है। हमारा और व्हॉट्सएप का ये मकसद है कि वो हर मैसेज का सही तरीके से जवाब दें न की उसपर लड़ना और बहस करना शुरू कर दें।

भारत में व्हॉट्सएप का यूजर बेस 200 मिलियन मंथली एक्टिव यूजर्स है। फेसबुक अधिकृत कंपनी फिलहाल प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज को लेकर विवादों में है। व्हॉट्सएप हाल ही में इससे छुटकारा पाने के लिए फॉर्वार्डेड लेबल और एक बार में सिर्फ 5 चैट को ही मैसेज फॉर्वड कर सकते है ऐसे फीचर लेकर सामने आया है।

व्हॉट्सएप हाल ही में 5 चैट वाला फीचर लेकर आया है जहां एक यूजर सिर्फ 5 चैट को ही एक बारी में फॉर्वर्ड कर सकता है जिसके बाद उस यूजर के लिए फॉर्वर्ड का ऑप्शन डिसेबल कर दिया जाएगा। व्हॉट्सएप के प्रमुख क्रिस डेनियल्स इसी सप्ताह सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद से मिले थे। प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा था कि सरकार ने व्हॉट्सएप से स्थानीय कॉरपोरेट इकाई स्थापित करने और फेक मैसेज सोर्स का पता लगाने को प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करने को कहा है। हालांकि, इसके साथ ही प्रसाद ने फेसबुक की कंपनी व्हॉट्सएप के भारत की डिजिटल कहानी में योगदान की सराहना भी की है। बैठक के बाद डेनियल्स ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। देश में अगले साल आम चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार सोशल मीडिया प्लेटफार्म मसलन फेसबुक, ट्वीटर और व्हॉट्सएप से फर्जी खबरों के प्रसार को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है।

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