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काव्य गोष्ठी—–ये ख्वाब अधूरेे , ये सपने—सुनीता सिंह

काव्य गोष्ठी—–ये ख्वाब अधूरेे , ये सपने—सुनीता सिंह

बहादुरगढ़———— कलमवीर विचार मंच की मासिक काव्य गोष्ठी रविवार को सेक्टर-9 स्थित कृष्ण कुंज में संपन्न हुई। वरिष्ठ ग़ज़लकार सतपाल स्नेही और कवि कृष्ण सौमित्र के सानिध्य में हुई इस गोष्ठी का संचालन गीतकार विद्यार्थी ने किया।

युवा शिक्षाविद सुनीता सिंह की सरस्वती वंदना से शुरू हुए इस काव्योत्सव में पधारे कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन के विभिन्न पहलुओं से जुड़े शब्द चित्र प्रस्तुत किए। लखनऊ मूल के कवि करुणेश वर्मा जिज्ञासु ने अपने अधूरे सपनों का उल्लेख करते हुए कहा कि…

कुछ लक्ष्य बाँध कर रखे हैं,
हमने इस जीवन में अपने।
देखो कब पूरे होते हैं,
ये ख्वाब अधूरेे ये सपने।

कवि कृष्ण सौमित्र ने भारत की वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि….

सत्य अहिंसा की वे बातें अब भारत में रही नहीं,
तेरी शिक्षा बापू मेरे अब भारत में रही नहीं।

नवोदित कवि मोहित कौशिक ने देश की सबसे बड़ी ज़रूरत बताया।उन्होंने कहा कि…..

जानते हो हमें क्या इस वक्त चाहिए,
हमें एक नेता देश भक्त चाहिए।

ग़ज़लकार सतपाल स्नेही ने कई खूबसूरत ग़ज़लें सुनाईं। उनके ये शेर बेहद पसंद किए गए..

माना भैया अपनी ऐसी ज़्यादा-सी औक़ात नहीं,
फिर भी शर्तों पर समझौता अपने बस की बात नहीं।
जाने कितनी पीड़ाओं से इन्हें गुज़रना पड़ता है,
बादल या आँखों से यूँ ही हो जाती बरसात नहीं।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे कवि कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने एक के बाद एक कई मुक्तक सुनाए।एक बानगी प्रस्तुत है..

दर्द का बाज़ार है ये ज़िन्दगी,
ग़म का कारोबार है ये ज़िन्दगी।
अब खरीदा है तो पढ़ भी लीजिये.
जैसा भी अखबार है ये ज़िन्दगी।

हरियाणवी कवि-कलाकार वीरेंद्र कौशिक ने अपने पहले प्यार को समर्पित रचना में कहा…

इतने दिनां बाद न्युं क्युकर तेरा आणा हो गया,
म्हारे प्यार का गवाह बणा जो,रूख पुराणा हो गया।

कार्यक्रम का संचालन कर रही सुनीता सिंह ने पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित युवाओं का उल्लेख करते हुए अपनी गौरवशाली पुरानी परम्पराओं की याद दिलाते हुए कहा…

सम्मान था सबकी आँखों में, मुस्कान थी सबके अधरों पर,
बहता था खून रगों में पर ना बहता था यूँ सड़कों पर।
अब बंदूकों के साए में फूलों का सिरहाना बीत गया,
जिसमें रहकर इतराते थे वह समय सुहाना बीत गया।

काव्योत्सव में पधारे दूबलधन के शिक्षाविद अजय भारद्वाज ने भी आने वाले शिक्षक दिवस और हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए भारत के शिक्षकों व राजभाषा हिन्दी के सम्मान की बात करते हुए कुछ प्रेरक मुक्तक सुनाकर सभी को भावविभोर किया।

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