वीडियो

चीटियों के एक लाइन में चलने का राज़ जानके आप चौंक जायेंगे



कि वो बड़े संगठित रूप से बस्तियों में रहती हैं. कहीं जाती हैं तो एक साथ जाती हैं और वो सीधी कतार में चलती हैं. हालांकि इंसानों के साथ ऐसा नहीं होता है. इंसान हमेशा खुद को जल्दी आगे निकालने के लिए कतार में नहीं चलता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि चींटियां क्यों एक कतार में चलती हैं? आइए जानते हैं.
प्रत्येक कीट अपने ढंग से विचारों और समाचारों का आदान-प्रदान करते हैं. मधुमक्खियाँ अपने छत्ते की एक सीमा तक महक फैला देती हैं ताकि अन्य मधुमक्खियां भटक न जाएं. इसी तरह चींटियां भी अपने सहयोगियों और समूह से सम्पर्क बनाए रखने और भोजन आदि की सही सूचना देने के लिए रसायनों का उपयोग करती हैं. चींटियाँ अपने जबड़ों के पास कि ग्रंथियों से एक स्त्राव निकाल कर मार्ग में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर रखती हैं. यह स्त्राव अन्य चींटियों को अपनी महक से रास्ता बताने का कार्य करती हैं. चींटियों की सूंघने की शक्ति बहुत प्रबल होती है.
जब चींटियां खाने की खोज में निकलती हैं तो सबसे आगे चलने वाली चींटी चलते समय फैरोमोंस नामक रसायन छोडती हैं. चींटियों में कुछ ग्रंथियाँ होती हैं जिनसे फैरोमोंस नामक रसायन निकलते हैं. इन्हीं के जरिए वो एक दूसरे के संपर्क में रहती हैं. चींटियों के दो स्पर्शश्रंगिकाएं या ऐंटिना होते हैं जिनसे वो सूंघने का काम करती हैं.
रानी चींटी भोजन की तलाश में निकलती है तो फैरोमोंस छोड़ती जाती है. दूसरी चीटियां अपने ऐंटिना से उसे सूंघती हुई रानी चींटी के पीछे-पीछे चली जाती हैं. जब रानी चींटी एक खास फैरोमोंस बनाना बंद कर देती है तो चीटियां नई चींटी को रानी चुन लेती हैं.
फैरोमोंस का प्रयोग और बहुत सी स्थितियों में होता है. जैसे अगर कोई चींटी कुचल जाए तो चेतावनी के लिए फैरोमोंस का रिसाव करती है जिससे बाकी चींटियां हमले के लिए तैयार हो जाती हैं. फैरोमोंस से यह भी पता चलता है कि कौन सी चींटी किस कार्यदल का हिस्सा है. इसी रसायन को सूंघ कर चीटिंया आगे बढती है और उनकी एक कतार बन जाती है. यही कारण है कि हमें चींटियां हमेशा लाइन में ही चलती हुई दिखाई देती है और इसी वजह से चींटियों को किसी तरह के कोई ट्रैफिक का सामना भी नहीं करना पड़ता है.



Leave a Comment