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गाजा बॉर्डर पर इजरायल सेना और फिलिस्तीनी नागरिकों में झड़प; 16 की मौत, 2000 से ज्यादा जख्मी

गाजा बॉर्डर पर इजरायल सेना और फिलिस्तीनी नागरिकों में झड़प; 16 की मौत, 2000 से ज्यादा जख्मी

येरुशलम. गाजा-इजरायल बॉर्डर पर शुक्रवार को हजारों फिलिस्तीनी नागरिकों ने प्रदर्शन किया। ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न कहे जाने वाले 6 हफ्ते के विरोध प्रदर्शन के पहले दिन इजरायली सेना से झड़प में करीब 16 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई। साथ ही करीब 2000 से ज्यादा लोग घायल बताए गए हैं। घटना के सामने आने के बाद यूएन सिक्युरिटी काउंसिल ने इजरायल से संयम बनाए रखने की अपील की है।

तीन पॉइंट्स में जानिए पूरा मामला?
1. बॉर्डर पर क्या हुआ?
– इजरायली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) के मुताबिक, जमीन दिवस के दिन करीब 17 हजार फिलिस्तीनी नागरिक बॉर्डर स्थित पांच स्थानों पर जुटे थे। ज्यादातर लोग अपने कैंप्स में ही थे हालांकि, कुछ युवा इजरायली सेना की चेतावनी के बावजूद सीमा पर ही हंगामा करने लगे। उन्होंने बार्डर पर पेट्रोल बम और पत्थरों से हमला किया। जिसके बाद आईडीएफ ने भीड़ को हटाने के लिए फायरिंग कर दी।
– इजरायल के अखबार येरुशलम पोस्ट के मुताबिक, सेना की गोलीबारी में मारे गए लोग सीमा पर स्थित बाड़े को लांघने की कोशिश कर रहे थे। फिलिस्तीनियों की भीड़ को देखते हुए इजरायल ने टैंकों और स्नाइपर्स का भी सहारा लिया। चश्मदीदों के मुताबिक, उन्होंने आंसू गैस के गोले गिराने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए भी देखा।

2. गोलीबारी पर इजरायल का पक्ष?
– इजरायल की सेना सुरक्षा को देखते हुए गाजा बॉर्डर पर नो-गो जोन की रखवाली करती है। सेना को फिलिस्तीन के जमीन दिवस में हजारों नागरिकों के जुटने की आशंका थी। इसी लिए यहां सेना को बढ़ाया गया था, ताकि फिलिस्तिनियों की ओर से बॉर्डर पार करने जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
– इजरायल के विदेश मंत्रालय ने इसे इजरायल से जानबूझकर टकराव बढ़ाने का प्रयास बताया। साथ ही इसके लिए फिलिस्तीन के संगठन हमास को जिम्मेदार बताया।

3. क्यों हो रहा टकराव?
– इजरायल-गाजा बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन के लिए फिलिस्तीन की ओर से 5 कैंप्स लगाए गए हैं। इन्हें ‘ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न’ नाम दिया गया है।
– विरोध प्रदर्शन 30 मार्च से शुरू हुए हैं। इस दिन फिलिस्तीन जमीन दिवस मनाता है। कहा जाता है कि इसी दिन 1976 में फिलिस्तीन पर इजरायल के कब्जे के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले 6 नागरिकों को इजरायली सेना ने मार दिया था।
– ये विरोध प्रदर्शन 15 मई के आसपास खत्म होंगे। इस दिन को फिलिस्तीन में नकबा (कयामत) के तौर पर मनाया जाता है। 1948 में इसी दिन इजरायल बना था, जिसके चलते हज़ारों फिलिस्तीनियों को अपने घर छोड़ने पड़े थे।

गाजा में और बिगड़ सकते हैं हालात: यूएन
– यूएन सिक्युरिटी काउंसिल ने न्यूयॉर्क में बैठक के दौरान मामले में जांच की बात कही। यूएन में राजनीतिक मामलों के डिप्टी चीफ ताए ब्रूक ने काउंसिल को बताया कि गाजा में आने वाले दिनों में हालात ज्यादा बिगड़ सकते हैं। उन्होंने मानवाधिकार मामलों में इजरायल से अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा औरतों और बच्चों को निशाना ना बनाए जाने की भी मांग की।

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