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यरूशलम में खुला अमरीकी दूतावास, इस्राइली फायरिंग में 52 फलस्तीनियों की मौत

यरूशलम में खुला अमरीकी दूतावास, इस्राइली फायरिंग में 52 फलस्तीनियों की मौत

अमेरिका ने सोमवार को तेल अवीव से अपना दूतावास स्थानांतरित कर यरूशलम में खोल दिया. अमेरिका के इस कदम से भड़के फिलिस्तीनी लोग इजरायली सैनिकों से भिड़ गए और इस दौरान इजरायली बलों की गोलीबारी में गाजा में कम से कम 55 लोग मारे गए. यह 2014 के बाद से सबसे भीषण हिंसा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यरूशलम को इजरायल की औपचारिक राजधानी के रूप में मान्यता देने के विवादास्पद कदम के तहत तेल अवीव से अपना दूतावास वहां स्थानांतरित करने की दिसंबर में घोषणा की थी. ट्रम्प ने यहां अमेरिकी दूतावास में अपने रिकार्डेड संदेश में कहा, ‘आज हमने यरूशलम में आधिकारिक रूप से अपना दूतावास खोल दिया. बधाई. इस अवसर को आने में लंबा समय लगा है.’

उन्होंने कहा , ‘इजरायल एक संप्रभु देश है जिसे किसी अन्य संप्रभु देश की तरह ही अपनी राजधानी तय करने के अधिकार प्राप्त हैं.’ ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच स्थाई शांति समझौता कराने को लेकर पूरी तरह कटिबद्ध है. उन्होंने कहा कि उनका देश टेम्पल माउंट में यथास्थिति का समर्थन करता है जो इजरायल-फिलिस्तीन के बीच संघर्ष का मुख्य बिन्दु है. यहां वेस्टर्न वाल है जो यहूदियों के लिए सबसे पवित्र स्थल है और यहां हरम अल शरीफ के नाम से जानी जाने वाली अल अक्सा मस्जिद भी है.

यरूशलम में अमेरिकी दूतावास खुलने के उद्घाटन समारोह की शुरुआत अमेरिका के राष्ट्रगान से हुई. इजरायल में अमेरिका के राजदूत डेविड फ्रीडमैन ने रेखांकित किया कि इजरायल को सबसे पहले देश के रूप में मान्यता देने वाले वाशिंगटन ने अब एक ऐसा कदम उठाया है जिसकी वर्षों से प्रतीक्षा की जा रही थी. उन्होंने कहा कि दूतावास को स्थानांतरित करने में ‘अमेरिका ने एक बार फिर आगे रहकर काम किया है.’

‘ये ट्रम्प के विजन, साहस और नैतिक स्पष्टता का परिणाम है’
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि कदम राष्ट्रपति ट्रम्प के ‘विजन, साहस और नैतिक स्पष्टता’ का परिणाम है जिनके हम हमेशा रिणी रहेंगे. यरूशलम में दूतावास खुलने पर ट्रम्प ने सुबह के अपने ट्वीट में इसे ‘इजरायल के लिए एक महान दिन’ बताया. उन्होंने सुबह के इस ट्वीट में हिंसा का कोई जिक्र नहीं किया, लेकिन कहा, ‘इजरायल के लिए एक महान दिन’.

अमेरिका का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दूतावास खुलने संबंधी समारोह में शामिल हुआ जिसमें अमेरिकी उप विदेश मंत्री जॉन सुलिवन, वित्त मंत्री स्टीवन मुनचिन, वरिष्ठ सलाहकार एवं ट्रम्प के दामाद जेअर्ड कुशनेर, वरिष्ठ सलाहकार एवं ट्रम्प की बेटी इवांका ट्रम्प और अंतरराष्ट्रीय वार्ता मामलों के विशेष प्रतिनिधि जैसन ग्रीनब्लैट शामिल थे.

इस अवसर पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी मौजूद थे. नेतन्याहू ने कहा, ‘एक ऐतिहासिक अवसर: अमेरिकी दूतावास हमारे राजधानी शहर-यरूशलम में खुल रहा है.’ उन्होंने ट्रम्प के ट्वीट के जवाब में कहा, ‘क्या शानदार दिन है, आपका धन्यवाद @ ट्रम्प.’ इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आज एक ऐतिहासिक दिन है जो हमारे लोगों, हमारे देश और हमारे गठबंधन के इतिहास में एक मील का पत्थर है.’

55 की मौत, 2400 घायल
नेतन्याहू ने दूतावास के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए कहा कि अपना वायदा पूरा करने के लिए साहस दिखाने पर धन्यवाद राष्ट्रपति ट्रम्प. इस बीच, गाजा सीमा पर प्रदर्शन कर रहे फलस्तीनी लोग इजरायली बलों से भिड़ गए. इसमें कम से कम 55 प्रदर्शनकारी मारे गए. गाजा में हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अब तक इजरायली गोलीबारी में 55 लोग मारे गए हैं और लगभग 2400 अन्य घायल हुए हैं. इनमें कम से कम 200 लोग 18 साल से कम उम्र के तथा 11 पत्रकार शामिल हैं.

फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और इजरायली सैनिकों पर पथराव किया. राष्ट्रपति महमूद अब्बास की पार्टी फतह के नेतृत्व वाले एवं वेस्ट बैंक के रामल्ला शहर स्थित फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने मरने वालों की संख्या बढ़ने पर इजरायल पर ‘भयानक कत्लेआम’ का आरोप लगाया. फलस्तीन सरकार के प्रवक्ता यूसुफ अल महमूद ने अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि ‘इजरायली बलों द्वारा गाजा में हमारे नायक लोगों का भयानक कत्लेआम किए जाने’ की ओर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है.

14 मई सबसे भयावह कत्लेआम का दिन
इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष में वर्ष 2014 के गाजा युद्ध के बाद आज का दिन मरने वालों की संख्या के चलते सबसे भयावह कत्लेआम का दिन बन गया. इजरायली रक्षाबलों ( आईडीएफ ) ने एक बयान जारी कर हमास पर ‘आतंकी अभियान का नेतृत्व करने’ और लोगों को भड़काने का आरोप लगाया. आईडीएफ ने कहा कि लगभग 35 हजार ‘हिंसक दंगाई’ गाजा और इजरायल के बीच सीमा पर लगी बाड़ के पास 12 स्थानों पर एकत्र हुए तथा सीमा से लगभग एक किलोमीटर दूर एक तंबू शहर में हजारों और लोग एकत्र हुए.

क्यों है विवाद
इजरायली सेना ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने बाड़बंदी के पास तैनात इजरायली सैनिकों पर देसी बम, जलते हुए टायर तथा पत्थर फेंके. दूतावास संबंधी यह कदम विवादास्पद है क्योंकि फिलिस्तीनी लोग यरूशलम के एक हिस्से को अपनी भविष्य की राजधानी मानते हैं. अरब जगत में अनेक लोगों के लिए यह इस्लाम से संबंधित सबसे पवित्र स्थलों में से एक है. शहर में यहूदियों और ईसाइयों के भी धार्मिक स्थल हैं. मुद्दा इतना विवादास्पद है कि अंतरराष्ट्रीय वार्ताकारों ने शांति समझौतों के अंतिम चरणों में यरूशलम से जुड़े प्रश्न को छोड़ दिया था.

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