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नेपाल के साथ हिंदुस्तान के संबंध का विश्लेषण

नेपाल के साथ हिंदुस्तान के संबंध का विश्लेषण

अब हम रामायण काल के राम-जानकी मार्ग का DNA टेस्ट करेंगे आज नेपाल के जनकपुर से अयोध्या के बीच बस सेवा प्रारम्भ हो गई है ये वही मार्ग है जिसका ज़िक्र रामायण में मिलता हैमाना जाता है कि महर्षि विश्वामित्र, ईश्वर श्री राम  लक्ष्मण को लेकर इस मार्ग से सीता स्वयंवर में भाग लेने के लिए जनकपुर गये थे पीएम नरेंद्र मोदी ने आज नेपाल के जनकपुर जाकर, पारंपरिक अंदाज़ में इस सेवा की आरंभ की है पीएम की ये यात्रा कूटनीति के लिहाज़ से भी बहुत जरूरी हैक्योंकि पिछले कुछ वक्त में नेपाल चाइना के ज़्यादा नज़दीक हो गया है

इसलिए युगों पुराने इस दोस्त को वापस हिंदुस्तान के नज़दीक लाना भी पीएम की इस यात्रा का एक लक्ष्य है हालांकि आज पीएम की यात्रा का पहला दिन पूरी तरह से धार्मिक रहा क्योंकि उन्होंने अपनी यात्रा की आरंभ नेपाल के जनकपुर से की जनकपुर वो स्थान है, जहां सीता जी का जन्म हुआ था  इसी स्थान पर हिंदुओं के आराध्य देव ईश्वर श्रीराम का स्वयंवर भी हुआ था यानी जनकपुर सीता जी का मायका  ईश्वर श्रीराम की ससुराल है इसीलिए जनकपुर को अयोध्या से जोड़ने के लिए आज एक बस सेवा की आरंभ की गई है

जनकपुर से अयोध्या की दूरी 500 किलोमीटर से भी ज्यादा है ये बस नेपाल के जनकपुर से दोपहर 12 बजे रवाना हुई जनकपुर, बिहार  नेपाल बॉर्डर के पास है इसलिए ये बस जनकपुर से बिहार के सीतामढ़ी आएगी, फिर बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर होते हुए गोरखपुर में प्रवेश करेगी ये बस रात में गोरखपुर में रुकेगी  बस यात्री यहां आराम करेंगे  फिर कल प्रातः काल 9 बजे ये बस अयोध्या पहुंचेगी इस रूट को रामायण काल से ही राम-जानकी मार्ग बोला जाता है इस मार्ग का वर्णन रामायण में भी मिलता है इसीलिए आज हम आपको रामायण काल के राम-जानकी मार्ग का पूरा Route दिखा रहे हैं

इस विषय पर शोध करते हुए हमें आज एक आर्टिक्ल मिला जिसमें रामायण काल का एक नक्शा दिया गया है इस नक्शे में वो जगहें दिखाई गई हैं, जहां से होकर श्रीराम, लक्ष्मण  महर्षि विश्वमित्र जनकपुर पहुंचे थे विश्वमित्र सहित कई ऋषि-मुनियों के यज्ञ को राक्षस खत्म कर देते थे इसलिए विश्वमित्र राम  लक्ष्मण को अपने साथ ले गए ताकि राक्षसों का संहार किया जा सके इसीलिए उनका पहला पड़ाव थी वो जगह, जिसे आज आज़मगढ़ के नाम से जाना जाता है इसके बाद विश्वमित्र  श्रीराम-लक्ष्मण बलिया पहुंचे, जहां तमाम ऋषि-मुनि, सरयू नदी के किनारे ध्यान लगाते थे

इसके बाद ये लोग उस स्थान पहुंचे, जिसे बक्सर बोला जाता है बक्सर आज बिहार राज्य में है इसी स्थान पर श्रीराम ने ताड़का का वध किया था तब ये स्थान ‘ताड़का वन’ कहलाती थी इसी स्थान के आसपास श्रीराम  लक्ष्मण ने कई राक्षसों का वध किया  इसी स्थान पर अहिल्या का उद्धार भी हुआ था इसके बाद वो विशाला नगरी पहुंचे जिसे आज हाजीपुर बोला जाता है  फिर वो ऋषि विश्वमित्र के आश्रम पहुंचे, जो आज के बिहार के मधुबनी में था वहां बिसौल नामक स्थान पर ऋषि विश्वमित्र का आश्रम था

यहां फुलहर नामक गांव में राजा जनक का एक उपवन था जहां सीता जी खेलने के लिए आती थींसीता जी ने पहली बार श्रीराम को इसी उपवन में देखा था जनकपुर, राजा जनक के राज्य की राजधानी थी वहां रंगभूमि में धनुष यज्ञ यानी सीता स्वयंवर हुआ था  यहीं पर ईश्वर राम ने शिव धनुष को तोड़कर ये स्वयंवर जीता था  फिर ईश्वर राम का सीता जी के साथ शादी हुआ था यानी आज के आधुनिक मार्ग  पौराणिक राम-जानकी मार्ग के बीच में कुछ असमानताएं हैं

नेपाल के साथ हिंदुस्तान का आस्था  भक्ति का रिश्ता भी है जनकपुर से अयोध्या तक की ये बस सेवा गवर्नमेंट की रामायण सर्किट योजना का एक बड़ा भाग है हिंदुस्तान के पर्यटन मंत्रालय की तरफ से रामायण सर्किट का निर्माण हो रहा है देशभर में ऐसी 15 जगहों की पहचान की गई है, जहां वनवास के दौरान श्रीराम गए थे ये जगहें हैं अयोध्या, श्रृंगवेरपुर, चित्रकूट, सीतामढ़ी, बक्सर, दरभंगा, महेन्द्र गिरी, जगदलपुर, नासिक, नागपुर, भद्राचलम, हंपी  रामेश्वरम

इन जगहों को विकसित करने के लिए इन्हें आपस में जोड़ा जा रहा है रामायण सर्किट के लिए आरंभमें करीब 224 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है
जनकपुर से अयोध्या के बीच प्रारम्भ हुई बस सेवा भी इसी रामायण सर्किट का भाग है

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