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सोशल मीडिया पर टैक्स लगाना देशहित मेंः राष्ट्रपति

युगांडाः सोशल नेटवर्किंग साइट एक ऐसा प्‍लेटफार्म है जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति अपने विचारों को दूसरे व्‍यक्तियों के पास भेजता है। सोशल मीडिया से हर वक्त चिपके रहने वाले लोगों को आजकल कहीं भी बड़े आराम से देखा जा सकता है। सोशल मीडिया अपनी बातों को दुनिया के सामने रखने का सबसे प्लेटफॉर्म हो गया है। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप जैसे ऐप पर दिन भर लोग अपनी भड़ास निकालते हैं लेकिन जरा सोचिए कि सरकार सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर टैक्स लेने लगे तो क्या होगा। ऐसा कुछ युगांडा में हुआ है। युगांडा की संसद ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों पर टैक्स लगाने के कानून को मंजूरी दे दी है। इस कानून के तहत जो लोग भी फेसबुक, व्हॉट्सऐप, वाइबर और ट्विटर जैसे सोशल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें हर दिन के हिसाब से करीब 3 रुपये 36 पैसे देने होंगे।

सोशल मीडिया पर टैक्स नहीं लगाना चाहिए

राष्ट्रपति मुसेवनी ने मार्च में ही इस कानून को लागू करने की वकालत शुरू कर दी थी। उन्होंने वित्त मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी थी। जिसमें उन्होंने लिखा था कि सोशल मीडिया पर टैक्स लगाना देश हित में होगा और इससे अफ़वाहों से उबरने में भी मदद मिलेगी। लेकिन उनकी ओर से जवाब में कहा गया था कि सोशल मीडिया पर टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए क्योंकि इसका इस्तेमाल शिक्षा और रिसर्च के लिए किया जाता है। आलोचकों का कहना कि यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करेगा लेकिन मुसेवनी ने इन सभी कयासों को यह कहकर दरकिनार कर दिया था कि इससे लोग इंटरनेट का कम इस्तेमाल करेंगे।

टैक्स लगने से गरीब तबका होगा प्रभावित

राष्ट्रपति योवेरी मुसेवनी ने इस कानून का समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून इसलिए लागू किया जा रहा है ताकि सोशल मीडिया पर अफवाहों को रोका जा सके। यह कानून 1 जुलाई से लागू हो गया है लेकिन इसे किस तरह से लागू किया जाएगा, इस बात को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। नई एक्साइज ड्यूटी बिल में कई और तरह के टैक्स भी हैं जिसमें कुल मोबाइल मनी ट्रांजेक्शन में अलग से एक फीसदी का टैक्स देना होगा। ऐसा माना जा रहा है कि इस तरह के टैक्स की वजह से युगांडा का गरीब वर्ग बुरी तरह से प्रभावित होगा। युगांडा के वित्त मंत्री डेविड बहाटी ने संसद में कहा कि यह बढ़े हुए टैक्स युगांडा के राष्ट्रीय कर्ज को कम करने के लिए लगाए गए हैं।

विशेषज्ञों ने टैक्स पर जताया संदेह

हालांकि विशेषज्ञों और कुछ इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स ने सोशल मीडिया पर लगाए जाने वाले रोजाना के इस टैक्स पर संदेह जताया है और इसे लागू कैसे किया जाएगा, इस पर सवाल उठाए हैं। युगांडा की सरकार मोबाइल सिम कार्ड्स के रजिस्ट्रेशन के मुद्दे पर जूझ रही है। देश में 2.3 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर्स हैं जिनमें से केवल 1.7 करोड़ ही इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि अब तक ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि अधिकारी ये कैसे पता करेंगे कि कौन सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा है और कौन नहीं।

भारत में क्या फेसबुक या व्हाट्सएप पर लग सकता है टैक्स ?

युगांडा में सोशल मीडिया टैक्स लगने की चर्चा पर भारत में इंटरनेट और साइबर क्राइम मामलों के जानकार पवन दुग्गल का कहना है कि अभी तो ऐसा कोई प्रावधान नहीं है लेकिन अगर सरकार चाहे तो टैक्स लगा सकती है। इस तरह का टैक्स लगाना बहुत फायदेमंद नहीं होगा क्योंकि अभी एक बहुत बड़े वर्ग का इंटरनेट पर आना बाकी है।

भारत में सोशल मीडिया पर टैक्स लगने के समर्थन में जानकार

हालांकि पवन दुग्गल ये जरूर मानते हैं कि भारत में भी फेसबुक और व्हॉट्सएप के माध्यम से फेक न्यूज काफी फैलती है क्योंकि ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे मैसेज आगे बढ़ा देते हैं। वो मानते हैं कि इस तरह के संदेशों को नियंत्रित करने की ज़रूरत है और संभव है कि टैक्स लगाने से इस पर कुछ हद तक नियंत्रण भी लगे, हालांकि वो ये भी मानते हैं कि ऐसे लोगों की पहचान कर पाना एक मुश्किल प्रक्रिया है।

मालूम हो कि सोशल मीडिया का सर्वाधिक उपयोग युवाओं के बीच हो रहा है। इसके उपयोग के पीछे सबसे बड़ा कारण है इसके फीचर। जिस प्रकार अन्य मीडिया टू एजुकेट, टू इंटरटेन, टू इनफॉर्म के फॉर्मूले पर काम करते हैं, ठीक उसी प्रकार सोशल मीडिया भी काम करता है। हर वो जानकारी जो यूजर्स को चाहिए, इस मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। लिंक, डॉक्यूमेंट, फोटो, वीडियो आदि को आसानी से शेयर किया जा सकता है, वो भी कुछ मिनटों या सेकंडों में। युवाओं के बीच इसका क्रेज इसलिए भी है, क्योंकि यह सब कुछ एक जगह ही उपलब्ध हो जाता है।

विश्व की जनसंख्या लगभग 7 अरब है जिनमें से 3 अरब लोग इंटरनेट यूजर्स हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव यूजर्स की संख्या लगभग 2.7 अरब है और मोबाइल से सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या लगभग 2.5 अरब है। विश्व के ये आंकड़े जानने के बाद कहा जा सकता है कि सोशल मीडिया का बहुत व्यापक प्रभाव है।

भारत भी सोशल मीडिया के प्रभाव से अछूता नहीं रहा है। भारत की कुल जनसंख्या लगभग 1.31 अरब है जिनमें से लगभग 46.2 करोड़ लोग इंटरनेट यूजर्स हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव यूजर्स लगभग 19.1 करोड़ हैं और मोबाइल से सोशल मीडिया ऑपरेट करने वालों की संख्या लगभग 16.9 करोड़ है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि सोशल मीडिया हमारे जीवन में कितनी गहरी पैठ बना चुका है।

सोशल मीडिया की विश्वभर में ग्रोथ रेट 30 प्रतिशत, जबकि भारत में 44 प्रतिशत है। ये सभी आंकड़े डिजिटल 2017 ग्लोबल ओवरव्यू के नाम से वीआर सोशल और हूटस्यूट ने प्रकाशित किए हैं। भारत भले ही प्रतिशत के आधार पर पीछे हो, परंतु संख्या के आधार पर चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। लेकिन यह सोचने का विषय है कि आज भी भारत इंटरनेट की उपलब्धता के मामले में बहुत पिछड़ा हुआ देश है।

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