दुनिया

ईरान परमाणु करार से अलग हुआ अमेरिका

ट्रंप के ऊर्जा सलाहकार माइकल काटानजारो देंगे इस्तीफा

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते से अमेरिका के अलग होने की घोषणा कर दी। ओबामा के समय हुए इस समझौते की ट्रंप पहले ही कई बार आलोचना कर चुके हैं। ट्रंप ने कहा, ‘मेरे लिए यह स्पष्ट है कि हम ईरान के परमाणु बम को नहीं रोक सकते। ईरान समझौता मूल रूप से दोषपूर्ण है। इसलिए, मैं आज ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने की घोषणा कर रहा हूं।’

इसके कुछ क्षण बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ ताजा प्रतिबंधों वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किये और देशों को ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर उसके साथ सहयोग करने के खिलाफ चेताया। अपने चुनाव प्रचार के समय से ही ट्रंप ने ओबामा के समय के ईरान परमाणु समझौते की कई बार आलोचना की है।उन्होंने समझौते को खराब बताया था। इस समझौते के वार्ताकार तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी थे।

जुलाई 2015 में ईरान और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों एवं जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के बीच वियना में ईरान परमाणु समझौता हुआ था। ट्रंप के फैसले का दुनियाभर में प्रभाव होगा। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी और पश्चिमी एशिया में तनाव बढे़गा।

ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद बीते 15 महीनों में देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर मंगलवार का यह फैसला सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने ट्रंप के इस निर्णय की निंदा की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने ट्रंप से इस समझौते से नहीं निकलने की अपील की थी।

ट्रंप के कदम को लेकर रूहानी ने चेताया
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने मंगलवार को आगाह किया कि अमेरिका के ईरान परमाणु करार से अलग हो जाने पर देश को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विश्व शक्तियों के साथ हुए इस परमाणु करार से अलग हटने का फैसला किया है। ट्रंप ने सोमवार रात ट्वीट कर कहा था कि वह करार को लेकर निर्णय का ऐलान करेंगे। ट्रंप का नाम लिए बगैर रूहानी ने तेहरान में पेट्रोलियम सम्मेलन में यह टिप्पणी की। ट्रंप के ट्वीट के बाद ईरान की तरफ से यह पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है।

रूहानी ने कहा, यह संभव है कि हमें तीन चार महीने तक समस्याओं का सामना करना पड़े, लेकिन यह दौर गुजर जाएगा। ईरान बाकी दुनिया के साथ काम करना चाहता है। वह दुनिया के साथ सकारात्मक रूप से जुड़े रहना चाहता है। ऐसा लगता है कि यह यूरोप के लिए संकेत है जो 2015 में हुए ऐतिहासिक परमाणु करार के बाद ईरान के साथ कई कारोबारी करारों से जुड़ा है।

Leave a Comment